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चिड़िया स्कूल नहीं जाती…

गौरया को आदिवासी अंचल में चकली चिड़िया के नाम से पहचानते हैं। स्कूल के बच्चे शाम को घर पर पढ़ने के लिए आते हैं। उनके साथ छोटी-छोटी चीजों पर बात करके, उनके अनुभवों को सामने लाने की कोशिश कर रहे थे। इसी क्रम में एक दिन मैनें बच्चों से पूछा कि चिड़िया देखी है। तो सबने कहा कि हां देखी है। तो फिर सवाल बना कि चिड़िया दिन भर क्या-क्या काम करती है ? इसे हम सबको लिखकर दिखाना है। तो बच्चों नें मजेदार जवाब लिखे। 

आठवीं कक्षा में पढ़ने वाला जितेश लिखता है कि चिड़िया दाना चुगने जाती है। जल पीने जाती है। घोंसला (घर) बनाती है। पेड़ पर बैठने जाती है।। खेलने जाती है। अण्डे देती है। एक गांव से दूसरे गांव में घूमने जाती है। अपने बच्चों के लिए खाना लेने जाती है। चिड़िया क्या काम नहीं करती है के जवाब में उसने लिखा कि वह स्कूल नहीं जाती और खाना नहीं बनाती है।  
विकेश लिखता कि चिड़िया इधर-उधर उड़ती रहती है। दाना चुगकर लाती है और छोटे बच्चों को खिलाती है। नहीं करने वाले कामों में उसने एक नई बात जोड़ी कि चिड़िया खेती नहीं करती। बादल लिखता है कि वह नीलेआकाश में घूमने जाती है। अन्नू लिखती है कि चिड़िया रात में सोती है। सुबह का टाइम हो तो बच्चों के लिए खाना लेने जाती है। शीला चिड़िया को चकली चिड़िया नाम देती है। बाकी बच्चों ने लिखा कि 
 चिड़िया रोटी नहीं बनाती
 चिड़िया किताब नहीं पढ़ सकती

चिड़िया पेड़ पर सो जाती है 
वह स्कूल नहीं जाती 
काम नहीं करती
 चिड़िया पढ़ती नहीं है
एक चिड़िया दूसरी 
चिड़िया से मिलती हैं
 आपस में बातें करती हैं
गांव-गांव जाकर दाने चुगती हैं
अपने छोटे बच्चों को खिलाती हैं
चिड़िया पेड़ पर घोसला बनाकर रहती है
चिड़िया स्कूल नहीं आती है
वह तालाब पर पानी पीने जाती है  

आखिर में गौरया के आइनें में अपना चेहरा देखने की भी बात चली। उसको लगता है कि आइनें में कोई और बैठा है। यह सोचकर वह जोर-जोर से शीशे पर चोंच से ठोकर मारती है। दाना चुगने के बाद वह बाकी का समय शीशे के साथ खेलने में बिताती है। इस बात को साइकिल पर बैठी दो गौरैया की तस्वीरों से समझा जा सकता है।

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