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October 2015

अर्ली लिट्रेसीः याद आते हैं ‘रीडिंग कैंपेन’ वाले दिन

अगर स्कूल आने वाले किसी बच्चे को पढ़ना ही नहीं आता है तो सारे विषय पढ़ाने का क्या मतलब है? ऐसे बच्चों को पढ़ना सिखाने के लिए राजस्थान में रीडिंग कैंपेन योजना शुरू की गयी थी। [...]

October 31, 2015

किताबों को हासिये पर ढकेलती पासबुक

अगर बच्चे छोटी उम्र से सवालों का जवाब खोजने के लिए किताब की बजाय पासबुक का सहारा लेने लग जाते हैं तो यह उनके पठन कौशल के विकास को प्रभावित करता है। इसके कारण बच्चे किसी पैराग्राफ़ को ज्यों का त्यों उतार तो देते हैं। मगर उसे पढ़कर समझना और उससे संबंधित सवालों का जवाब देना उनके लिए बेहद मुश्किल होता है। [...]

October 31, 2015

जानना जरूरी है: रवीना मिड डे मील क्यों खाती है?

सरकार की तरफ़ से स्कूली बच्चों को खाना देने की बजाय पैसे देने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। आदिवासी और ग्रामीण अंचल के सरकारी स्कूलों में मिलने वाले भोजन के बदले पैसा देने का विकल्प बहुत से बच्चों को भोजन के अधिकार से वंचित कर देना होगा। [...]

October 30, 2015

मिड डे मील स्कीमः ‘हे भगवान! ऐसा भोजन हमें रोज़ देना’

पहली जुलाई को एक स्कूल में एमडीएम की रोटियां खा रहा था। इस योजना के बारे में ख़बर तभी बनती है, जब खाने में या तो चूहे-छिपकली गिरें। मगर इस बार योजना के सकारात्मक पहलू को जानने के लिए पढ़िये यह पोस्ट। [...]

October 29, 2015

शिक्षण प्रक्रियाः क्या आप भी दो-तीन बच्चों को पूरी क्लास समझते हैं?

अगर कोई शिक्षक कक्षा के कुछ ख़ास बच्चों पर ही ध्यान देेते हैं तो कक्षा के बाकी बच्चों की उपेक्षा होती है। यह उपेक्षा उन बच्चों के आत्मविश्वास को तोड़ने के साथ-साथ उनके अधिगम स्तर के नीचे गिरने की प्रमुख वजह बन जाती है। [...]

October 28, 2015

बच्चों की दुनियाः ‘अपना मॉनिटर ख़ुद बनो’

कौन बनेगा मॉनीटर? इस सवाल के जवाब में बहुत से हाथ ऊपर थे। लेकिन अपना मॉनिटर बनने वाली बात पर बच्चों के बीच कोई होड़ नहीं थी। इस बात पर सारे बच्चे हैरानी से एक-दूसरे का चेहरा देख रहे थे। [...]

October 28, 2015