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नई शिक्षा नीतिः पास और फेल की नई स्टोरी!!

स्कूल में पहली जुलाई का दिन ख़ास होता है। आमतौर पर इसी दिन से नए सत्र की शुरुआत होती है। आज से राजस्थान के स्कूलों में मोबाइल के माध्यम से एमडीएम की सूचना देने की योजना शुरू की गई। बहुत से स्कूलों में मैसेज भेजने और नेटवर्क की दिक्कत आने जैसी बात सामने आ रही है।

इसके साथ ही एक नई परिस्थिति का जिक्र हुआ कि जो नंबर इसके लिए रजिस्टर कराया गया है, उसके काम न करने की स्थिति में क्या होगा? इसको लेकर विचार-विमर्श जारी है। आने वाले दिनों में भी इस मुद्दे की पड़ताल जारी रहेगी।

‘शिक्षक बनने का सफर’

आठवीं कक्षा पास करने वाले बच्चे स्कूल में रिजल्ट आने के बाद आए हुए थे। उनको टीसी का इंतज़ार था। वे शिक्षकों के साथ अपने ग्रेड के ऊपर चर्चा कर रहे थे। एक छात्रा ने कहा, “अभी शिक्षक बनने के लिए काफी लंबा सफर तय करना है।” यह बात उसने आठवीं कक्षा को पढ़ाने व सिखाने वाली बात के जवाब में कही। अध्यापिका उसकी हाजिर-जवाबी की तारीफ कर रही थीं।

वहीं शिक्षकों के बीच नए सत्र में स्थानांतरण को लेकर चर्चा हो रही थी। इसके साथ ही आठवीं तक के बच्चों को फेल करने वाले मुद्दे की भी चर्चा हो रही थी, जिसका जिक्र नई शिक्षा नीति में किया गया है। हालांकि इसमें पांचवीं तक के बच्चों को फेल न करने की बात कही गई है।

नई शिक्षा नीति में बच्चों को फेल करने वाले मुद्दे पर ज़ोर देने की असल वजह बच्चों का शैक्षिक स्तर बेहतर करना बताया गया है। इसके साथ ही सीखने के ज्यादा अवसर देने की बात कही गई है।

मगर बहुत सी जरूरी बातों का उल्लेख नहीं होता। मसलन मूल्यांकन क्या सिर्फ बच्चों का होना चाहिए। अगर पहली से पांचवीं क्लास तक के बच्चे पढ़ना-लिखना सीखने के मामले में पिछड़ रहे हैं तो इसमें उनका क्या दोष है? गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का असल मायने तो यही है कि वह बच्चों के सीखने के तरीके में विविधता का सम्मान करे। उसे ज्यादा अवसर दे।

बच्चों ने खूब परेशान किया

जुलाई की शुरुआत बड़ी अच्छी रही। पहले दिन बच्चों ने खूब परेशान किया। मगर इस परेशानी का अपना आनंद है। अपनी खुशी है। बच्चों को उनकी पुरानी आदतें याद आ रही हैं। पूरी क्लास एक साथ छुट्टी मांग रही थी। एक बच्चे को देखकर दूसरे छुट्टी के लिए कह रहा थे। उनके अभिभावक स्कूल में बच्चों से मिलने के लिए आ रहे थे, जो पहली कक्षा में पढ़ रहे हैं। ताकि यह जान सकें कि वे रो तो नहीं रहे। उनको अच्छा लगा कि उनके बच्चे कहानी सुन रहे हैं, बाकी बच्चों के साथ मस्ती कर रहे हैं और स्कूल में नए दोस्तों के साथ खुश हैं।

दूसरी कक्षा के बच्चे किताबें पढ़ रहे थे। दूसरे बच्चों को किताब पढ़ने में सपोर्ट कर रहे थे। कुछ बच्चे किताब पढ़ने से बचने के लिए पानी पीने की छुट्टी मांग रहे थे, मगर उनको भी छुट्टी एक-दो पाठ पढ़ने के बाद मिली। क्योंकि वे पहले भी दो बार पानी पीने के लिए जा चुके थे। जब बाकी बच्चे सामने बैठकर पाठ पढ़ रहे थे और उससे जुड़े सवालों के जवाब दे रहे थे। खाने की छुट्टी के दौरान की व्यवस्था देखने लायक थी। इतनी व्यस्थित स्कूलों को देखकर लगता है कि सारी स्कूलें अगर ऐसी हों तो क्या बात हो>आने वाले दिनों में बच्चों के पास नई किताबें होंगी। कुछ बच्चों को नए स्कूल में दाखिला मिलेगा। यानि आने वाले दिनों में ढेर सारी नई कहानियां लिखी जाने वाली हैं। उनको पढ़ने के लिए कीजिए थोड़ा सा इंतज़ार। अगली पोस्ट में फिर मिलते हैं एक नई स्टोरी के साथ। आने वाली पोस्ट्स में चर्चा नई शिक्षा नीति पर भी होगी, थोड़े विस्तार के साथ।

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