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पठन गतिविधिः मुखर वाचन कैसे करें?

20190709_0001223067083977940832684.jpgराष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के रीडिंग डेवेलपमेंट सैल द्वारा प्रकाशित एक पुस्तक ‘पढ़ने की समझ’ भारत में पढ़ने के संकट को लेकर विस्तार में बात करती है। इसके साथ ही साथ यह बच्चे और भाषा को भी एक अलग नज़रिये से देखने में मदद करती है।

पढ़ना सीखने में स्कूल की क्या भूमिका हो सकती है, यह संदर्शिका या पुस्तिका इस सवाल का भी जवाब देती है। पढ़ने को लेकर एक व्यवस्थित नज़रिया कैसे विकसित करें, ऐसे सवालों के जवाब से भी यह किताब रूबरू कराती है। इसकी कीमत मात्र 75 रूपये है। अगर आपको भी मौका मिले तो यह किताब जरूर पढ़िए। इसमें शिक्षक की एक नई अवधारणा सामने आती है जिसे ‘रीडिंग टीचर’ की संज्ञा दी गई है यानि ऐसे शिक्षक जो लगातार पढ़ते रहते हैं और साथ ही साथ बच्चों को भी निरंतर पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं और किताबों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करते हैं।

पढ़ेंः नई शिक्षा नीति – 2019 के ड्राफ्ट में लाइब्रेरी को लेकर क्या सुझाव दिए गए हैं?

मुखर वाचन क्यों जरूरी है?

रीडिंग रिसर्च की शब्दावली में एक शब्द कि जिक्र बार-बार आता है कि बच्चे को ‘स्वतंत्र पाठक’ होना चाहिए। स्वतंत्र पाठक का अर्थ है कि कोई बच्चा जो अपनी उम्र, कक्षा व पठन स्तर वाली किताबों को बिना किसी शिक्षक की मदद के आसानी से समझते हुए पढ़ पाए। इसके साथ ही अपनी रुचि के अनरूप किताबों का चुनाव कर पाए। पढ़ने का आनंद ले पाए।

20190426_142411255318242474259775.jpgपढ़ने के मामले में इस तरह की स्वतंत्रता हासिल करने वाले बच्चे को ‘स्वतंत्र पाठक’ कहते हैं। स्वतंत्र पाठक की खूबी है उन्नत पठन कौशल और पढ़ने की आदत। बच्चों का रुझान पढ़ने की तरफ विकसित करने और किताबों से जोड़ने में मुखर वाचन (Read Aloud) की गतिविधि बेहद अहम भूमिका निभाती है।

मुखर वाचन की गतिविधि कैसे करें?

  1. अपनी लाइब्रेरी से पसंद की किताब का चुनाव करें और उसे दो-तीन बार पढ़ें। इस कहानी को बोलकर पढ़ें और बतौर रीडर पढ़ने का रिहर्सल करें।
  2. किताब को पढ़ने के बाद इसके मुख्य पृष्ठ पर ग़ौर करें, और सोचें कि इस किताब पर शुरुआती चर्चा के लिए कौन-कौन से सवाल पूछ सकते हैं? इस किताब के मुख्य पृष्ठ पर आपको क्या दिख रहा है? इस किताब की कहानी क्या हो सकती है? इस कहानी में कौन-कौन से पात्र होंगे? इत्यादि।
  3. इसके बाद किताब की कहानी को पढ़ते हुए 2-3 ऐसी जगहों का चुनाव करें, जहाँ आप कहानी को बीच में रोककर बच्चों से अनुमान या कल्पना वाले सवाल पूछ सकें कि कहानी में आगे क्या होगा? या कोई पात्र आगे क्या करेगा?
  4. इसके बाद कहानी समाप्त होने के बाद आप बच्चों के साथ कौन सी गतिविधि को करवाना चाहते हैं, इस पर भी पहले से विचार कर लें और किसी एक गतिविधि का चुनाव कर लें। आमतौर पर कहानी पर चर्चा वाले सवाल पूछे जाते हैं जो ज्यादातर सूचनात्मक होते हैं। कहानी पर चर्चा करते समय ध्यान रखें कि बच्चों को कल्पना, समानूभूति, विश्लेषण, तर्क और सूचना सभी तरह के सवाल करें ताकि सवालों की विविधता बनी रहे। सवालों पर चर्चा के अलावा आप बच्चों को चित्र बनाने की गतिविधि में शामिल कर सकते हैं। इसके अलावा उनको रोल प्ले तैयार करने का अवसर भी दे सकते हैं। इससे बच्चों को कहानी के साथ थोड़ी देर और रहने का समय मिलेगा।
  5. उपरोक्त पूर्व-तैयारी के बाद अगर आप कक्षा में बच्चों के साथ रीड अलाउड या मुखर वाचन की गतिविधि करते हैं तो बच्चों के साथ एक व्यवस्थित संवाद व चर्चा होने की गुंजाइश कई गुना बढ़ जाती है। इसके बाद आप मुख्य पृष्ठ पर चर्चा करें, फिर कहानी सुनाते हुए बीच में अनुमान वाले 2-3 सवाल पूछिए और बच्चों को जवाब देने के लिए थोड़ा समय दें। बीच-बीच में चित्रों को भी दिखाइए और कक्षा के सभी बच्चों को चित्र देखने का मौका दें। इसके बाद कहानी समाप्त करके फिर समापन वाली गतिविधि पर लौटें। कहानी सुनाने के बाद बच्चों को कहानी पर अपने विचार लिखने का मौका भी दे सकते हैं जो 4 या 5 में पढ़ रहे हैं।

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