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अर्ली लिट्रेसी

अर्ली लिट्रेसी को प्रारंभिक साक्षरता भी कहते हैं। इसके अनुसार पढ़ना एक बुनियादी कौशल है। इस कौशल पर बच्चों का शेष विकास निर्भर है। इसलिए शुरुआती सालों में बच्चे का पढ़ना-लिखना सीखना बहुत मायने रखता है।

उन्नाव: शिक्षकों के बीच आपसी सहयोग और नवाचारों की शेयरिंग जरूरी – टीके शिबू 

उन्नाव के शिक्षकों को परिषदीय विद्यालयों में अच्छा काम करने के लिए रोहैम्पटन यूनिवर्सिटी लंदन का प्रमाण पत्र मिला। [...]

September 25, 2017

पहली-दूसरी कक्षा को कैसे पढ़ाएं, बता रहे हैं एक शिक्षक प्रशिक्षक

इस पोस्ट में पढ़िए एक शिक्षक प्रशिक्षक से बातचीत, जो पहली-दूसरी कक्षा में भाषा के ऊपर काम करने के तरीकों के बारे में बता रहे हैं। [...]

December 18, 2015

अर्ली लिट्रेसीः याद आते हैं ‘रीडिंग कैंपेन’ वाले दिन

अगर स्कूल आने वाले किसी बच्चे को पढ़ना ही नहीं आता है तो सारे विषय पढ़ाने का क्या मतलब है? ऐसे बच्चों को पढ़ना सिखाने के लिए राजस्थान में रीडिंग कैंपेन योजना शुरू की गयी थी। [...]

October 31, 2015

अर्ली लिट्रेसीः पहली कक्षा में पढ़ रहे कम उम्र के बच्चों का क्या होगा?

शिक्षा के अधिकार क़ानून के मुताबिक़ पहली कक्षा में बच्चों के प्रवेश की सही उम्र छह साल है। लेकिन बहुत से सरकारी स्कूलों में इससे कम उम्र के बच्चों का नामांकन किया रहा है। इस पोस्ट में जानिए क्या है ऐसे नामांकन के पीछे की वजह क्या है? [...]

October 27, 2015

अर्ली लिट्रेसीः क्या हैं मायने?

बचपन की साक्षरता (अर्ली लिट्रेसी) के बारे में प्रोफ़ेसर कृष्ण कुमार कहते हैं कि पढ़ना एक ऐसा बुनियादी कौशल है। जिसके ऊपर बच्चों का शेष विकास निर्भर करता है। इसलिए बच्चों के स्वाभाविक विकास की प्रक्रिया में पढ़ना-लिखना सिखाना बेहद महत्वपूर्ण है। [...]

August 29, 2015

नज़रियाः 110 बच्चों को एक कालांश में पढ़ाते हैं एक शिक्षक

तीन कक्षाओं को हिंदी पढ़ाने के लिए एक शिक्षक को मात्र एक कालांश मिला है क्योंकि आठवीं तक के इस विद्यालय में मात्र पाँच शिक्षक हैं। मगर इनकी सोच और काम करने का नज़रिया काबिल-ए-तारीफ़ है। पढ़िए पूरी कहानी इस पोस्ट में। [...]

August 23, 2015

भारत में पूर्व-प्राथमिक शिक्षाः आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ाई क्यों नहीं होती?

भारत में पूर्व-प्राथमिक शिक्षा की स्थिति आगे की असमानताओं के लिए काफी हद तक जिम्मेदार हैं। आखिर आंगनबाड़ी केंद्रों को पर्याप्त महत्व क्यों नहीं दिया जा रहा है। [...]

January 5, 2013