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आज भी प्रासंगिक हैं टैगोर

रवींद्रनाथ टैगोरः ‘प्रकृति और सामाजिक संदर्भ से दूर न हो शिक्षा’

रवींद्रनाथ टैगोर भारत के पहले दार्शनिक थे जिन्होंने बच्चों का सवाल उठाया और शिक्षा में व्यापक सुधार का सुझाव दिया। उन्होंने इस सच्चाई पर अफसोस जताया था कि तत्कालीन शिक्षा व्यवस्था किताबों की गुलामी को प्रोत्साहन देती थी। [...]

May 9, 2015