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शिक्षा दर्शन

रवींद्रनाथ टैगोरः ‘प्रकृति और सामाजिक संदर्भ से दूर न हो शिक्षा’

रवींद्रनाथ टैगोर भारत के पहले दार्शनिक थे जिन्होंने बच्चों का सवाल उठाया और शिक्षा में व्यापक सुधार का सुझाव दिया। उन्होंने इस सच्चाई पर अफसोस जताया था कि तत्कालीन शिक्षा व्यवस्था किताबों की गुलामी को प्रोत्साहन देती थी। [...]

May 9, 2015

शिक्षा दर्शनः आज भी प्रासंगिक हैं रूसो

18वीं शताब्दी के महान दार्शनिक ज्यां जाक रूसो शिक्षा में उपदेश की परंपरा के पूर्णतः ख़िलाफ़ थे. उनका बच्चों की अच्छाई में गहरा विश्वास थी. 21वीं शताब्दी में भी उनके विचारों की प्रासंगिकता ज्यों की त्यों बरकरार है. [...]

November 5, 2014