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शिक्षा संवादः एजुकेशन मिरर के बनने की कहानी

बच्चे, पढ़ना सीखना, बच्चे का शब्द भण्डार कैसे बनता है‘एजुकेशन मिरर’ शिक्षा से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर विमर्श और संवाद को प्रोत्साहित करने का एक जरिया है। ताकि शिक्षा से जुड़े विभिन्न आयामों पर बात हो सके। इस क्षेत्र से जुड़े विभिन्न लोगों के विचार सामने आ सकें। ज़मीनी स्तर पर क्या अच्छा हो रहा है, उसके बारे में पता लगा सकें।

जाहिर सी बात है कि इस सिलसिले को आगे बढ़ाना और ले जाना किसी अकेले के वश की बात नहीं है। इसलिए यह एक ऐसा सफर है, जिसमें हम सभी लोग शामिल है। इस संदर्भ में एजुकेशन मिरर एक साझा सफ़र है, जिसके मुसाफिरों में हम सभी का नाम शामिल है।

21वीं सदी में भारत को विकसित देश बनाने का स्वपन बुना जा रहा है. इस स्वपन को साकार करने में शिक्षा व्यवस्था में बदलाव करना होगा. प्राथमिक शिक्षा को बेहतर बनाना होगा. प्रगतिशील समाज के विचारों को पोषित करना होगा. समाज के विरोधाभाषों पर उंगुली रखनी होगी. उनके बीच संवाद के सिलसिलों को आगे बढ़ाना होगा ताकि सामाजिक समन्वय और समरसता को बढ़ावा दिया जा सके. उसी दिशा में सोचने और संवाद की आवश्यकता के मद्देनज़र इनसे जुड़े मूलभूत मुद्दों पर लिखना शुरू किया ताकि समाज की वर्तमान नब्ज पर पकड़ बनी रहे. समस्याओं की समझ और निदान के रास्ते खोजने का क्रम बना रहे.

संक्षेप में, “एजुकेशन मिरर शिक्षा क्षेत्र और मीडिया को आपस में जोड़ने वाले एक विचार की हकीकत है। जिसे प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से आप सभी का सहयोग मिलता रहा है।”

नये लेखकों का स्वागत है

एजुकेशन मिरर का एक प्रमुख उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में नये साथियों को शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर लिखने के लिए प्रोत्साहित करना भी है। ताकि देश के विभिन्न हिस्से में काम कर रहे शिक्षक साथी और शिक्षक प्रशिक्षक उन विचारों का शिक्षण के लिए कक्षा में इस्तेमाल कर सकें।

एजुकेशन मिरर पर अब तक 450 से ज्यादा पोस्ट्स प्रकाशित हो चुकी हैं। यानि आने वाले दिनों में हम 500 के आसपास पहुंच जाएंगे। इस पर विज़िट करने वाले साथियों की संख्या 2 लाख से भी ज्यादा है। वहीं कुल हिट्स साल 2017 में 3 लाख 50 हज़ार से भी ज्यादा हो गई हैं। शिक्षा जगत की ज़मीनी सच्चाइयों पर रौशनी डालने की जरूरत है। ताकि हम सकारात्मक सोच और नज़रिए के साथ शिक्षा पर संवाद के सिलसिले को आगे बढ़ा सकें।

Thane-Municipal-Corporation-schoolसंवाद की रौशनी हर तरफ से आनी चाहिए। बच्चों की तरफ से। अभिभावकों की तरफ से। शिक्षकों की तरफ से। शिक्षक प्रशिक्षकों की तरफ से। पत्रकारों और शिक्षा में शोध करने वाले छात्रों की तरफ से भी।

एजुकेशन मिरर की शुरुआत इस दिशा में एक पहल है। ताकि शिक्षा पर संवाद कि सिलसिले को विस्तार दिया जा सके। इस पूरी प्रक्रिया इस बात का सदैव ध्यान रहता है कि ऐसी भाषा में बातचीत हो जो हर किसी के लिए सहज और ग्राह्य हो।

आज हमारे एक साथी ओमपाल जी ने बताया, “‘एजुकेशन मिरर’ पर प्रकाशित होने वाली सामग्री की भाषा सहज है। जो नये साथियों का शिक्षा के क्षेत्र में एक रुचि विकसित करने की दिशा में मदद करेगी। इससे जरूरत के अनुसार कठिन सामग्री को पढ़ने के लिए भी उनके भीतर का संकोच भी टूटेगा। इस सिलसिले में उन्होंने एनसीएफ-2005 वाली पोस्ट और तोत्तो-चान पर लिखे लेखक नितेश वर्मा के आलेख का ख़ासतौर पर जिक्र किया।”

हमारा का उद्देश्य क्या है?

हिंदी में शिक्षा का विमर्श हो। हिंदी में शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर अच्छे उदाहरण मौजूद हो। हिंदी में गुणवत्तापूर्ण सामग्री का सृजन हो, चाहें वे जमीनी अनुभव हों या फिर शोध की सामग्री हो। यह काम जाहिर सी बात है कि पुराने स्थापित तरीकों से नहीं हो सकता। जो सिलसिला पिछले कई सालों से चला आ रहा है, उस तरीके से नहीं हो सकता है।

एक सरकारी स्कूल की कहानीजाहिर सी बात है कि इसके लिए नए लोगों को अपने कंफर्ट जोन से बाहर आना होगा। अपने को कमतर मानने या समझने की परंपरागत सोच को बदलना होगा। नन्ही-नन्ही कोशिश से एजुकेशन मिरर जैसी पहल अपने साथ ऐसे लोगों को जोड़ने में कामयाब रही है, जो इसे पढ़ते हैं। इसकी बातों को क्लासरूम तक ले जाते हैं। कहीं संदेह होता है तो सवाल भी पूछ लेते हैं। यह आत्मीयता और स्नेह बना रहे।

नए दोस्तों को लिखने के लिए प्रेरित करने की प्रतिबद्धता हमारी तरफ से जारी रहेगी ताकि उस साझा खुशी के लम्हों को बार-बार जीवंत किया जा सके जो पहले लेख के छपने पर मिलती है। किसी की तारीफ से मिलती है कि आपने बहुत अच्छा लिखा है। इस कोशिश को जारी रखिए। ऐसी कोशिशों को प्रोत्साहित करने में मुझे खुशी मिलती है। किसी के आत्मविश्वास को बढ़ाने और खूबियों को रेखांकित करने में खुशी मिलती है।

ऐसे प्रयासों में बाधा पहुंचाने वाले प्रयासों की खुली आलोचना का सुख भी मिलता है। आलोचना और तारीफ़ के इस सिलसिले में इस सफ़र को और आगे ले जाने का इरादा है। इस सफर में हमेशा साथ रहने वाले दोस्तों का शूक्रगुजार महसूस करता हूं, जिसकी वज़ह से यह सफ़र रफ़्ता-रफ़्ता अपनी मंज़िल की तरफ आगे बढ़ रहा है।

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