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चर्चा मेंः भारत के संदर्भ में कितना प्रभावशाली है ‘प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी’ का आइडिया?

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शिक्षा के प्राथमिक व माध्यमिक दोनों स्तरों पर शिक्षक और शिक्षकों की क्षमता में बढ़ोत्तरी के लिए गंभीरतापूर्वक विचार किया गया है। इस गंभीरता की मुख्य वजह ज़मीनी स्तर पर बदलाव लाने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस विचार को मूर्त रूप देने के लिए शिक्षकों के बीच आपसी संवाद को रचनात्मक दिशा देने और मिलकर समस्याओं का समाधान खोजने को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है।

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के क्रियान्वयन से जुड़ा एक दस्तावेज़ माध्यमिक स्तर के शिक्षकों के उन्मुखीकरण के संदर्भ में कहता है, “स्कूली शिक्षा में शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण घटक हैं, ऐसे में सेवा-कालीन प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार के प्रयास किये जाने चाहिए। इसके अलावा सेवा-पूर्व प्रशिक्षण में दाखिले के लिए भी उचित प्रावधान करने की जरूरत है।”

शिक्षकों को मिले सीखने और अनुभवों को साझा का अवसर

हमारे देश में माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में राज्यवार काफी विभिन्नताएं हैं। उदाहरण के तौर पर पूर्वोत्तर राज्यों में अन्य राज्यों की तुलना में शिक्षकों के प्रशिक्षण की पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं।

पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए और सतत उन्नयन को ध्यान में रखते हुए राज्य स्तर पर नियोजित तरीके से काम करने की जरूरत है। इसकी एक पंक्ति हैं, “ परंपरागत सेवा-कालीन प्रशिक्षण के साथ-साथ हमें, ऐसा कुछ करने की जरूरत होगी ताकि माध्यमिक स्तर के शिक्षक आपस में अपने अनुभवों को साझा कर सकें और एक-दूसरे से सीख सकें। ताकि एक ‘सीखने वाले समुदाय के रूप में शिक्षकों’ की पहचान बने और संस्कृति का विकसित हो सके।”

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