शिक्षक डायरी: ‘सात बार टूटी, मगर आँसुओं के बीच जगी जिद ने बनाया कॉलेज टॉपर’
स्वालिहा खातून लिखती हैं, "प्रोजेक्ट रिजेक्ट होने पर बह रहे आँसुओं के बीच मैंने खुद से कहा—'मैं हिंदी माध्यम से हूँ तो क्या हुआ? इतनी दूर हार मानकर लौटने के लिए नहीं आई हूँ। अब लौटूँगी तो जीतकर ही।'" [...]


























































