बच्चों ने कहा, “देखो! हम प्यार की रानी बना रहे हैं”

बच्चों में पढ़ने की आदत का विकास करने के लिए लाइब्रेरी जरूरी हैं।
एक संस्था में काम करने के दौरान मेरा परिचय ‘समर कैंप’ शब्द के साथ हुआ। यह वर्ष 2015 की बात है। गर्मी की छुट्टियों के दौरान हम बच्चों के साथ एक दिन का समर कैंप किया करते थे। बच्चे स्कूल आते। धमाचौकड़ी करते। बिस्किट और टॉफी खाते। कहानी सुनते। चित्र बनाते और एक साथ मिलकर तस्वीर खिंचवाते। स्कूलों की संख्या के हिसाब से हर दिन अलग-अलग स्कूल में समर कैंप करना होता था।
राजस्थान की गर्मी और समर कैंप की तैयारी में एक बात ध्यान रखनी होती थी कि पानी की भरपूर व्यवस्था हो और बच्चों को किसी तरह की दिक्कत न हो। जब बच्चे समूह में बालगीत गाते और विभिन्न खेल गतिविधियों में हिस्सा लेते थे तो माहौल देखने लायक होता था। स्कूल बंद होने बाद समर कैंप की योजना बनानी होती थी। लाइब्रेरी वाले रूम की चाभी हमारे पास रहे, इस बात की कोशिश होती थी।
बच्चों की पसंद थी भूतों वाली कहानियाँ
समर कैंप के दौरान बच्चों को एक भूत वाली कहानी बहुत पसंद आई थी। बच्चों ने चित्र बनाते समय उस भूत को भी चित्र के रूप में शामिल किया। इससे एक हल्की सी झलक मिली थी कि कैसे सुनी हुई कहानी अलग-अलग माध्यमों से फिर अभिव्यक्त होने का रास्ता खोज लेती है। समर कैंप के दौरान लिट्रेसी और लर्निंग लेवल वाले सवाल थोड़ा दूर होते थे, इसलिए सुकून के साथ काम करना संभव होता था। बच्चों के साथ इंज्वाय करने और नई-नई कहानियों को सुनने-सुनाने का मौका मिलता था।
चित्रकारी में बच्चों की तल्लीनता देखने लायक थी

एक बार एक बच्ची ने कहा, “देखो हम प्यार की रानी बना रहे हैं।” वह उस समय एक किताब के मुख्य पृष्ठ को चित्रों के जरिये व्यक्त करने की कोशिश कर रही थी। बच्चों को स्वतंत्र रूप से पढ़ने और किताबों के साथ अपने तरीके से चित्रों पर चर्चा करने और चित्र बनाने का मौका देना चाहिए ताकि वे खुद की रचनात्मक व कलात्मक अभिव्यक्ति को बाहर आने का रास्ता दे सकें।
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