स्कूल डायरी: ‘शिक्षक पूछ रहे थे कि आपने क्या जादू कर दिया है?”

आज स्कूल में संतोष मैम की क्लास में मौजूद होना हैरान करने वाला अनुभव था। मैम ने एक दिन का पूरा हिस्सा प्लान के मुताबिक़ पढ़ाया। उनकी सक्रियता देखकर विद्यालय के अन्य शिक्षक साथी शिक्षक पूछ रहे थे कि आपने क्या जादू कर दिया है? उनके सहयोगी शिक्षक संदर्शिका और वर्कबुक के पन्ने पलट रहे थे।
उन्होंने बताया कि हमारे समय में बच्चों को पढ़ाने का यही तरीका अपनाया जाता था, बच्चों को पहले बुनियादी मोड़ वाली गतिविधि के माध्यम से लिखने के लिए तैयार किया जाता था। इसके बाद उनको वर्ण ज्ञान से रूबरू करवाया जाता था। लेकिन इस दौरान होने वाली बातचीत में ध्वनि जागरूकता वाला हिस्सा मिसिंग था।
संतोष मैम ने सबसे पहले एक बालगीत करवाया। इसके ठीक बाद पुनरावृत्ति का काम कराया और फिर ध्वनि जागरूकता वाला गतिविधि में बच्चों को /ए/ की आवाज़ से रूबरू करवाया। इसके बाद उन्होंने ए वर्ण को पहचानने और लिखने वाली गतिविधि का अभ्यास करवाया। इस दौरान सबसे ख़ास बात थी कि सभी बच्चों के जवाब आ रहे थे। वे अपनी सहभागिता दे रहे थे। इस प्रक्रिया में I do, we do और yo do वाला हिस्सा थोड़ा लचीले ढंग से हो रहा था। मैंने मैम को इसे बारे में बताया कि अगर वह उस दिन होने वाली गतिविधि का पहले से अभ्यास कर लें और संक्षेप में नोट्स बना लें तो उनको काफी आसानी होगी।
बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि आज काफ़ी मेहनत करके कहानियों की किताब खोजी। लालू और पीलू कहानी अंग्रेज़ी भाषा में थी, इसलिए मैम इस कहानी को पढ़ा नहीं पाईं। उनका यह भी कहना था कि कुछ कहानियां बच्चों के सर के ऊपर से गुजर रही हैं। उनकी इस बात को पाठ पढ़ाने के दौरान ग़ौर से देखने का मौका मिला। कुछ बच्चों के लिए पतंग जैसा शब्द भी अज़नबी सा प्रतीत हो रहा था।
इसके अलावा प्रत्येक बच्चे तक मैम की पहुंचने की कोशिश भी काफ़ी अच्छी लगी। उत्तम को बाकी बच्चों की मदद करने में काफ़ी आनंद आ रहा था। इस क्लास के बच्चों की उम्र आरटीई के अनुसार लगी। बाकी स्कूलों की तुलना में यह स्कूल काफ़ी व्यवस्थित और बेहतर नज़र आई।
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