बीएमसी शिक्षक की कहानी: “शिक्षा ही गरीबी के चक्र को तोड़ने की असली कुंजी है”

मुंबई के परेल भोईवाडा महानगर पालिका मराठी शाला में कार्यरत एक समर्पित शिक्षक गौरव कर्डीले, झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले वंचित बच्चों का जीवन शिक्षा के माध्यम से बदल रहे हैं। उनकी शिक्षण पद्धति केवल किताबों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डिजिटल तकनीक, रचनात्मकता और नवाचार से युक्त है। जिन बच्चों ने वर्षों तक स्कूल का नाम भी नहीं सुना था, उन्हें कक्षा तक लाना और शिक्षा से जोड़ने का कार्य उन्होंने सक्रियता के साथ किया है।
समुदाय के साथ संवाद से बढ़ी जागरूकता

उनका समर्पण केवल कक्षा-कक्ष में शिक्षण तक सीमित नहीं है। वे नियमित रूप से झोपड़पट्टियों में जाकर परिवारों से संवाद करते हैं, अभिभावकों को शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक करते हैं। उन्हें समझाते हैं कि शिक्षा ही उनके बच्चों के जीवन की दिशा बदल सकती है। उनके अथक प्रयासों से दर्जनों बच्चे, जिन्होंने कभी स्कूल का दरवाज़ा तक नहीं देखा था, अब शिक्षा की ओर बढ़ रहे हैं।
तकनीक ने कक्षा शिक्षण को बनाया रोचक

आज के डिजिटल युग में उन्होंने शिक्षा को बच्चों के लिए आकर्षक और सरल बनाने का काम किया है। वे स्मार्ट क्लास, ऑनलाइन शैक्षिक सामग्री और डिजिटल टूल्स का उपयोग करते हैं। इसके साथ ही वे कहानियों, खेलों, समूहगत चर्चाओं और गतिविधि-आधारित शिक्षण जैसी विधियों का इस्तेमाल कर बच्चों में सीखने की जिज्ञासा जगाते हैं। उनकी मेहनत से शिक्षा केवल किताबों की भाषा नहीं, बल्कि बच्चों के जीवन का अनुभव बन गई है।
शिक्षा ही गरीबी से मुक्ति का मार्ग
गौरव सर कहते हैं, “शिक्षा ही वह कुंजी है जो गरीबी के दुष्चक्र को तोड़ सकती है। हर बच्चे को, चाहे वह किसी भी परिस्थिति में जन्मा हो, शिक्षा का समान अवसर मिलना चाहिए।”
इस सोच और जुनून ने बहुत से अभिभावकों और माता-पिता का दृष्टिकोण बदला है। आज झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले कई माता-पिता शिक्षा को अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की पहली सीढ़ी मानते हैं।
बच्चों के साथ सहज जुड़ाव

वे कहते हैं कि एक सफल शिक्षक वही है, जो बच्चों से जुड़ाव बनाए और उन्हें सीखने में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करे। वे छात्रों की ताकत और कमज़ोरियों को समझते हैं और हर बच्चे को यह एहसास दिलाते हैं कि वह मूल्यवान है। इस पहचान की भावना से बच्चे आत्मविश्वास के साथ सीखने की प्रक्रिया में शामिल होते हैं।
स्पष्ट दिशा, अनुशासन और प्रोत्साहन की संस्कृति
उनकी शिक्षण पद्धति का एक और महत्वपूर्ण पहलू है स्पष्ट अपेक्षाएँ और अनुशासित दिनचर्या। यह बच्चों को स्थिर वातावरण देती है, जिसमें वे अपनी जिम्मेदारियों को समझ पाते हैं और बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं।
गौरव सर अपने छात्रों में आत्मविश्वास और ग्रोथ माइंडसेट विकसित करने के लिए हमेशा प्रोत्साहन और प्रशंसा का उपयोग करते हैं। उनका विश्वास है कि यदि बच्चों को प्रोत्साहन और प्रेरणा दी जाए, तो वे कठिन से कठिन परिस्थितियों से भी जूझने का साहस विकसित कर सकते हैं।
वे केवल बच्चों को किताबें ही नहीं पढ़ाते, बल्कि बच्चों को भावनात्मक बुद्धिमत्ता (जैसे सहानुभूति, धैर्य और आत्मनियंत्रण) भी सिखाते हैं, ताकि वे जीवन की चुनौतियों का सामना मजबूती से कर सकें।
एक नए भविष्य की नींव
उनका कार्य इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कैसे एक शिक्षक की निष्ठा, नवाचार और संवेदनशीलता बच्चों का जीवन बदल सकती है। वे केवल शिक्षा नहीं दे रहे, बल्कि बच्चों को वह शक्ति, आत्मविश्वास और साधन दे रहे हैं, जिनसे वे विपरीत परिस्थितियों पर विजय प्राप्त कर सकें और अपने लिए एक उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर सकें।

यह कहानी सिर्फ़ एक शिक्षक की नहीं, बल्कि उस सोच की है जो समाज के हर बच्चे के लिए समान अवसर की माँग करती है। गौरव कर्डीले जैसे शिक्षक ही आने वाली पीढ़ियों को यह विश्वास दिला रहे हैं कि गरीबी, संघर्ष और कठिनाइयाँ अंतिम सत्य नहीं हैं— शिक्षा से इन्हें बदला जा सकता है।
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Well explained Gaurav ji . Only Education can change the status of anyone.
famous saying- If u are born poor its not your fault but if u die poor its ur fault.
Lets motivate our Parents and Children