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Articles by Virjesh Singh

पेट में छुपी कहानियाँ: भीतर की आवाज़ को बाहर लाने वाली एक सुंदर चित्रकथा

शिवनारायण गौर लिखते हैं कि पेट में छुपी कहानियाँ जैसी किताब बच्चों को अपनी भावनाओं को समझने और व्यक्त करने का साहस देती है।" [...]

शिक्षक डायरी: ‘सात बार टूटी, मगर आँसुओं के बीच जगी जिद ने बनाया कॉलेज टॉपर’

स्वालिहा खातून लिखती हैं, "प्रोजेक्ट रिजेक्ट होने पर बह रहे आँसुओं के बीच मैंने खुद से कहा—'मैं हिंदी माध्यम से हूँ तो क्या हुआ? इतनी दूर हार मानकर लौटने के लिए नहीं आई हूँ। अब लौटूँगी तो जीतकर ही।'" [...]

डायरी: चाक-डस्टर, ब्लैकबोर्ड और संवाद: अध्यापन के एक दशक का आत्मीय सफर

अरविंद कुमार सिंह लिखते हैं, "पिछले दस वर्षों में अध्यापन ने मुझे जितना बच्चों को सिखाने का अवसर दिया, उससे कहीं अधिक स्वयं सीखने का अवसर दिया है। इस यात्रा ने मेरी कक्षा, बच्चों और सीखने को देखने की दृष्टि बदल दी। यह लेख उन्हीं अनुभवों, संवादों और सीखों का आत्मीय लेखा-जोखा है, जिन्होंने मुझे हर दिन एक बेहतर शिक्षक और बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा दी।" [...]

लेख- ‘गणित विषय से दोस्ती की पहली सीढ़ी है ‘संख्या पूर्व अवधारणा’

क्या गणित का डर संख्याओं से शुरू होता है, या उससे पहले? जानिए कैसे एक-एक की संगति, क्रम और पैटर्न जैसी सरल अवधारणाएँ बच्चों के गणित सीखने की मजबूत नींव बनाती हैं। [...]

मुंबई: परेल भोईवाडा मराठी शाला में ‘डिजिटल बदलाव’ की प्रेरक कहानी

मुंबई स्थित परेल भोईवाडा मनपा मराठी शाला में 'डिजिटल शिक्षा में बदलाव' की यह कहानी बताती है कि परिवर्तन हमेशा बड़े शहरों के बड़े स्कूलों से नहीं, एक छोटे से क्लासरूम से शुरू होता है। [...]

पुस्तक चर्चा: नाच पढ़ते हुए लगा, “यह तो मेरी ही कहानी है”

राकेश पेगू की नज़र से 'नाच' उपन्यास की संवेदनशील समीक्षा। जानिए क्यों नवनीत नीरव का यह उपन्यास आत्मस्वीकार, सपनों और अभिव्यक्ति की आज़ादी की एक यादगार कहानी है। [...]

जोड़-घटाव के सवाल: संक्रियाओं के निशान को समझने में चूक या समझ की एक झलक

इस लेख में रवि कांत जी ने संक्रियाओं के प्रतीकों (जैसे जोड़, घटाव इत्यादि) की पहचान व समझ में होने वाली चूक का एक रोचक समाधान दिया है। बुनियादी संख्या ज्ञान के प्रयासों को जमीनी स्तर पर उतारने का प्रयास करने वाले साथी जरूर पढ़ें और अपनी टिप्पणी भी लिखें। [...]

एक कक्षा-एक पुस्तकालय: बनती ईंटों के बीच उगते सपने

ईंट-भट्टों की बस्तियों में कम संसाधनों के बीच बच्चों तक किताबें पहुँचाने और पढ़ने के प्रति चाव पैदा करने की पहल बताती है कि सीखने की लौ कहीं भी जलाई जा सकती है। — रवि कांत [...]