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बच्चे याद दिलाते हैं कि ‘आज मम्मी-पापा की भी ऑनलाइन क्लास है’

प्रिया लिखती हैं कि शिक्षक प्रशिक्षण के पुराने दिनों का फिर से इंतज़ार है।

कोविड-19 के इस दौर में आमने-सामने के संवाद की जगह तकनीक ने ले ली हैI वर्तमान में हर चीज़, हर शौक, हर जरुरत अब ऑनलाइन प्लेटफार्म के जरिये ही हम तक पहुँच रही हैI ऐसे में शिक्षा से जुड़े हमारे काम का स्वरूप भी बदला हैI हमारी बहुत से शिक्षकों के साथ आजकल ऑनलाइन माध्यम से ही बातचीत हो रही हैI जब पहले स्कूल खुले रहते थे, वहां जाना होता था, शिक्षकों से मुलाक़ात होती थी, बच्चों से भी मिलना होता था।

ऐसे बहुत से ऐसे मंच होते थे जहाँ विभिन्न शिक्षक-प्रशिक्षणों के माध्यम से शिक्षकों से रू-ब-रू होते थेI इन सब प्रक्रियाओं में जहाँ स्वयं की समझ को भी कई आयाम मिलते थे। वहीं विभिन्न शैक्षिक जरूरतों का भी पता चलता थाI जब हम किसी से आमने-सामने मिलते हैं तो हमारा चेहरा, हमारे हाव- भाव, अभिव्यक्ति से सामने वाले के साथ एक जुड़ाव बनता है और हम एक-दूसरे को अपनी बात ज्यादा बेहतर तरीके से व्यक्त भी कर पाते हैंI पर यही बातचीत अगर इस तरह हो जहाँ आप एक-दूसरे को देख नहीं पा रहे और हमारी आवाज ही माध्यम है उन सभी भावों,विचारों को एक-दूसरे तक पहुंचाने का जो हम पहुंचाना चाहते हैं तब क्या होता है?

आजकल ऐसा ही अनुभव हो रहा हैI लेकिन इस दौरान बहुत से शिक्षकों के साथ ऑनलाइन जुड़ना और उनमें काफी सारे नामों से परिचित होने का अवसर भी मिला है, जिनसे आज तक कभी मिलना नहीं हुआ था. सिर्फ एक ही रिश्ता कि हम सब एक ही क्षेत्र में काम कर रहे हैंI

‘जब फिर से स्कूल खुलेंगे..’

इस दौर में कई ऐसे अनुभव हुए जो मन मस्तिष्क में दर्ज हो चुके हैं, काफी सुखद अनुभव हैं ये अनुभव जिन्हें लिखित रूप में भी दर्ज करना जरुरी ही लगता है।

आखिर इस दौर में ऐसा क्या है जो हमें एक-दूसरे से जोड़ रहा है। शायद वह हम सबकी एक सी साझी चिंताएं हैंI इस दौर में भी हम सभी को एक-दूसरे के स्वास्थ्य की और बच्चों की शिक्षा जारी रखने की चिंता है। वर्तमान की तैयारी के कारण जब फिर से स्कूल खुलेंगे और हम उन बच्चों से रु-ब-रू होंगे तो स्वयं को पहले से भी अधिक मजबूती से खड़ा हुआ पायेंगे, हमारा ऐसा विश्वास हैI और फिर हमारी कुछ शैक्षिक जरूरतें भी हैं जो हमारे पेशे के लिए निहायत जरुरी हैI

इनमें महत्वपूर्ण वह जुड़ाव भी है जो शिक्षकों के साथ अनुभव हो रहा हैI कैसे उनसे फ़ोन पर कुछ 5- 10 मिनट की बातचीत और 1.30 घंटे के ऑनलाइन सत्र के दौरान उनसे इतना गहरा सम्बन्ध बन जाता है, जिनसे कभी मिलना हुआ ही नहीं। बस हम अपनी आवाज से ही तो उन तक पहुँच रहे हैंI

शिक्षकों में इतनी ललक है इन ऑनलाइन सत्रों/बातचीत में जुडने की कि कभी वे अपने घर में बेहतर नेटवर्क होने की जगह तलाशते हैं कि कहाँ नेटवर्क बेहतर होगा और वे ठीक से बात कर पायेंगें, हमें सुन पायेंगेI बीच-बीच में नेटवर्क की जद्दोजहद और जुड़ने, डिसकनेक्टहोने और फिर जुड़ने की प्रकिया भी चलती रहती है। फिर भी निर्धारित समय में उनकी कोशिशें उनकी लगन को प्रदर्शित करती हैं, तो कभी लगातार उनके द्वारा किये गए फ़ोन काल और मेसेज हमें बताते हैं कि उन्हें भी वर्तमान समय के साझे सरोकारों की चिंता हैI

‘मम्मी-पापा की ऑनलाइन क्लास है’

शिक्षक स्वयं को नयी तकनीक के साथ अपडेट रखना चाहते हैं। कुछ समझ नहीं आने पर या अटकने पर वे अपने बच्चो की भी मदद लेते हैं। कुछ शिक्षकों के साथ तो ऐसे भी अनुभव हुए कि उनके बच्चे उन्हें याद दिलाते हैं कि आज उनके मम्मी-पापा की भी ऑनलाइन क्लास हैI

शिक्षकों ने अपना टाइम टेबल कुछ इस तरह ढाल लिया है कि ठीक निर्धारित समय पर अपने सभी कामों से फारिग होकर ऑनलाइन सत्रों में जुड़ते हैं। ऐसा लगता है जैसे ये ऑनलाइन बातचीत उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गयी हो जैसे और इस बातचीत का हिस्सा बनने का कोई भी मौका वे नहीं चूकना चाहतेI

एक प्रदर्शनी में शामिल होने का अनुभव। ऐसे दिनों की फिर से बहाली होगी ऐसी उम्मीद है।

इस बीच शिक्षक अपने स्कूल के बच्चों से भी जुड़े हैं। उनके साथ जो कुछ भी काम वे कर पाते हैं उन अनुभवो को भी साझा करते हैंI इस बीच यह भी समझ आया है कि मानवीय संबंधों की बहुत ही महत्ता है। एक मनुष्य दूसरे मनुष्य के भीतर बहुत कुछ तलाशता है और इस तलाश में वह खुद को भी कहीं न कहीं पाने का प्रयास भी करता हैI

शिक्षा का विमर्श भी तो कुछ ऐसा ही है जिसमें हम बहुत कुछ एक-दूसरे को आदान-प्रदान कर रहे होते हैं और इस प्रक्रिया में वह जुड़ाव बहुत जरूरी है जिससे एक-दूसरे को बेहतर समझा जा सकेI फिर से इन सबके बीच बहुत ही सुखद हैं ये सब अनुभव जो मन में उमंग की लहर तो लाते ही हैं। इसके साथ ही एक विश्वास भी जगाते हैं I

(एजुकेशन मिरर के लिए यह लेख प्रिया जायसवाल ने लिखा है। उन्होंने इस लेख में कोविड-19 के दौरान हो रहे अनुभवों को सहजता से व्यक्त किया है। इसमें वर्तमान की चिंताओं की झलक है तो भविष्य की उम्मीद भी है। आप वर्तमान में अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन देहरादून में कार्यरत हैं। आप एजुकेशन मिरर को फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो कर सकते हैं। इसके यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करने के लिए यहां क्लिक करें। एजुकेशन मिरर के लिए अपनी स्टोरी/लेख भेजें Whatsapp: 9076578600 पर, Email: educationmirrors@gmail.com पर।)

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