Trending

शिक्षा मनोविज्ञान में ‘स्कीमा’ के मायने क्या हैं?

रीडिंग विथ मीनिंग, डेबी मिलर

समझ के साथ पढ़ना सिखाने की रणनितियों को सहज भाषा में बताने वाली किताब है रीडिंग विथ मीनिंग।

डेबी मिलर अपनी किताब रीडिंग विथ मीनिंग में लिखती हैं कि हम किसी विषय में जो भी जानते हैं, वह हमारा स्कीमा होता है। एक तरीके से यह हमारी सोच या थिंकिंग है। जब हम किसी विषय के बारे में अपनी सोच/विचार/समझ में बदलाव करते हैं तो हमारा स्कीमा भी परिवर्तित होता है। इस तरीके से हम कह सकते हैं कि स्कीमा (Schema) एक गतिशील अवधारणा है जो सीखने के नये अवसरों, नये अनुभवों, नई यात्राओं, अध्ययन व संवाद के माध्यम से बनती है और उसमें नई-नई चीज़ें जुड़ती रहती है।

इसके अनुसार हम जो कुछ भी नया सीखते हैं, उसमें हम जो पहले से जानते हैं (यानि पूर्व ज्ञान) उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। एनसीएफ-2005 में भी बच्चों को कुछ नया सिखाने से पहले उनके पूर्व-ज्ञान को सक्रिय बनाने की बात कही गई है। ताकि बच्चे किसी नई अवधारणा को सीखने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो सकें। ध्यान देने वाली बात है कि स्कीमा की अवधारणा का सबसे पहले उपयोग जीन पियाजे ने किया गया।

स्कीमा की अवधारणा का अवधारणा का महत्व

उदाहरण के तौर पर अगर बच्चों को एनसीईआरटी की बरखा सिरीज़ की कहानी ‘पका आम’ सुनाने के लिए जा रहे हैं तो बच्चों के साथ किताब के मुख्य पृष्ठ पर बात कर सकते हैं कि किताब के मुख्य पृष्ठ पर आपको क्या-क्या दिख रहा है? किताब के शीर्षक के आधार पर आपको क्या लगता है कि यह कहानी किस बारे में होगी? आपमें से किस-किस ने पका आम खाया है? पके आम और कच्चे आम में क्या अंतर होता है? आम से जुड़ी हुई कोई रोचक घटना बताएं जो आप सबके साथ साझा करना चाहते हैं। ऐसी बातचीत के माध्यम से आप बच्चों को अपने पूर्व-ज्ञान को कक्षा-कक्ष में चर्चा के लिए लाने का अवसर दें तो पूरी कक्षा का आम से जुड़ा हुआ पूर्व-ज्ञान सक्रिय हो जाएगा।

स्कीमा और मेमोरी का क्या रिश्ता है?

शिक्षा मनोविज्ञान के अध्ययन के मुताबिक़ जब हम अपने स्कीमा का इस्तेमाल करते हैं तो उसमें नई चीज़ें जुड़ती हैं। जैसे अगर हम किसी पत्ती को गिरते हुए देखते हैं तो सोचते हैं कि पत्ती गिर रही है। यह दृश्य देखकर हमारे मन में पत्ती के गिरने से संबंधित पूर्व के अनुभव सक्रिय हो जाते हैं। जिसमें आप इस नये अनुभव को भी शामिल कर लेते हैं। आप जो कुछ भी सुनते, देखते और महसूस करते हैं, आप जिन जगहों पर घूमने के लिए जाते हैं, इनसे आपके स्कीमा में स्वतः ही नई चीज़ें शामिल होती है। जब आप अपने स्कीमा का इस्तेमाल करते हैं तो आपकी मेमोरी यानि स्मृति सक्रिय हो जाती है। इस तथ्य के आधार पर हम कह सकते हैं कि स्कीमा हमारी दीर्घकालीन स्मृति से संबंधित है, जहाँ से चीजें याद होकर वर्किंग मेमोरी या शार्ट टर्म मेमोरी में आती हैं।

इस बारे में शिक्षा मनोविज्ञान से जुड़े विशेषज्ञ कहते हैं कि किन्हीं दो व्यक्तियों के स्कीमा का एक जैसा होना संभव नही है क्योंकि हर कोई अलग-अलग चीज़ें करता है, अलग-अलग जगहों पर जाता है, अलग तरह की किताबें पढ़ता है। इसलिए हर किसी का स्कीमा अलग होता है। स्कीमा को ज्ञान, समझ या अनुभव को व्यवस्थित ढंग से रखने से जोड़कर भी देखना चाहिए।

(शिक्षा से संबंधित लेख, विश्लेषण और समसामयिक चर्चा के लिए आप एजुकेशन मिरर को फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो कर सकते हैं। एजुकेशन मिरर के यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करने के लिए यहां क्लिक करें। एजुकेशन मिरर अब टेलीग्राम पर भी उपलब्ध है। यहां क्लिक करके आप सब्सक्राइब कर सकते हैं। एजुकेशन मिरर के लिए अपनी स्टोरी/लेख भेजें Whatsapp: 9076578600 पर, Email: educationmirrors@gmail.com पर।)

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

3 Comments
Newest
Oldest Most Voted
Anonymous
Anonymous
5 years ago

most imp,

Anonymous
Anonymous
5 years ago

Very nice

Durga thakre
Durga thakre
5 years ago

ज्ञानवर्धक लेख

3
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x