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बच्चों को पंसद है ‘दोस्ती’

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रूम टू रीड द्वारा प्रकशित इस किताब के लेखक विश्वंभर हैं। इस किताब के चित्र प्रोइती राय ने बनाए हैं।

बच्चों को दोस्ती करना पसंद है। दोस्ती की थीम पर बनी कहानियां पढ़ना भी पसंद है। यही कारण है कि इस थीम पर ढेर सारी कहानियां बच्चों के लिए लिखी गयी हैं। ‘दोस्ती’ शीर्षक से लिखी इस कहानी के लेखक विश्वंभर हैं। इस किताब का प्रकाशन ‘रूम टू रीड’ ने किया है। इस कहानी के लिए चित्र प्रोइती राय ने बनाए हैं।

लायब्रेरी में पुस्तकालय कालांश के दौरान दूसरी कक्षा के बच्चों के साथ ‘दोस्ती’ शीर्षक वाली किताब पढ़ने के दौरान पता चला कि बच्चे बड़ी सहजता से समाज की बातों को आत्मसात करते चलते हैं, जिसका जिक्र बच्चों से होने वाली बातचीत में होता है।

किताबें भी हैं हमारी दोस्त

सात-आठ साल के बच्चे के मन में दोस्ती के बारे में एक धारणा बनी कि लड़के और लड़की दोस्त नहीं होते। मगर इनके दोस्त होने की बात बच्चों को बेहद नई लगी। इस बात पर वे हँस-हँसकर लोट-पोट हो रहे थे। उनको हैरानी हो रही थी कि लड़के और लड़की दोस्त हो सकते हैं। भैया और बहन दोस्त होते हैं, भले ही वे आपस में झगड़ा करते हैं। इस एक पंक्ति के माध्यम से उनको जेंडर वाले पहलू पर फिर से सोचने का मौका मिला कि भैया तो लड़का है और मैं लड़की अगर हम लोगों के बीच दोस्ती हो सकती है तो फिर लड़के और लड़की के बीच में भी दोस्ती हो सकती है।

नानी किसको कहानी सुना रही हैं? अपने दोस्त को कहानी सुना रही हैं। बच्चे लड़की और नानी के बीच के रिश्ते को दोस्ती वाले रिश्ते से परिभाषित कर रहे थे। किताबों को भी बच्चों ने अपने दोस्त के रूप में देखा। किताबें दोस्त क्यों हैं? इस सवाल के जवाब में बच्चों ने कहा, “किताबें पढ़ने में हमें खूब मजा आता है, इसलिए किताबें भी हमारी दोस्त हैं।” मम्मी-पापा के दोस्त होने वाली बात पर बच्चों को हँसी आ रही थी। इस कहानी का सबसे मजेदार हिस्सा टीचर हमें सिखातीं, टीचर मेरी दोस्त वाला था। जहाँ बच्चे खिलखिलाकर हँस रहे थे और अपनी शिक्षिका को दोस्त के रूप में देख रहे थे।

‘चित्र बहुत प्यारे हैं’

कहानी के चित्र कैसे बने हैं? इस सवाल के जवाब में बच्चों ने कहा, “चित्र प्यारे बने हैं। चित्र काफी बढ़िया हैं।” चित्र में कई सारे कुत्ते हैं, इस बात को भी बच्चों ने चित्रकार की ज़िंदगी से जोड़कर देखने की कोशिश की। इस कहानी के चित्र प्रोइती राय ने बनाए हैं। बच्चों को चित्रकार के बारे में यह जानना काफी अच्छा लगा कि उनके घर में 15 कुत्ते हैं। इस किताब की सबसे बड़ी खासियत है कम शब्दों में कोई बात सफलतापूर्वक कहने का अंदाज है।

इस किताब में बच्चे कम शब्दों के बावजूद दोस्ती के रिश्ते को अपनी ज़िंदगी से जोड़कर देख पाते हैं। नानी के जिक्र पर एक बच्ची की आँखों में आँसू आ गये। उसकी नानी अब इस दुनिया में नहीं हैं। खुद बड़े होने पर किताब से बच्चों को कहानी सुनाने वाली बात पर बच्चों की हँसी रुकने का नाम नहीं ले रही थी। वे अपने जीवन में ऐसे लम्हे को धड़कता हुआ महसूस कर रहे थे। कहानी के लेखक का बहुत-बहुत शुक्रिया इस सुंदर किताब के लिए और चित्रकार का भी सुंदर चित्रों के लिए जो बच्चों से सीधे जुड़ जाते हैं।

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