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लेखन के समय ध्यान रखने वाली ख़ास बातें क्या हैं?

anjali-Jiअंजली जी  के सत्र में पढ़ने की प्रक्रिया को लेकर बात हुई कि हम किसी लिखित सामग्री कौ कैसे समझें? इसके लिए किसी लिखित सामग्री को सरसरी निगाह से देखना, फिर उसे शीर्षक, उप-शीर्षक और की वर्ड्स को ध्यान से देखते हुए एक आइडिया लेते हैं कि इस आलेख में क्या होगा? इसके बाद हम उसे विस्तार से पढ़ें तो हमको चीज़ें ज्यादा अच्छे से समझ में आती हैं।

लेखन के समय ध्यान रखने वाली बातें

इस तरीके का उपयोग प्रतिभागियों ने विभिन्न लेखों को पढ़ते हुए किया। इस दौरान बात हुई कि किसी आलेख को लिखते समय उप-शीर्षक देना पाठक के लिए काफी मददगार होता है। एक आलेख को कम से कम तीन बार पढ़ना चाहिए ताकि उसका अर्थ अच्छे से स्पष्ट हो।

किसी टॉपिक पर खुद लिखने से पहले हमें मुख्य बिंदुओं को नोट कर लेना चाहिए, यानि हम जो बात लेख के माध्यम से कहना या बताना चाहते हैं। फिर आलेख का खाका बनाना चाहिए। इसके बाद में जानकारी और समझ के लिए रिसर्च का बिंदु आता है जहाँ हम विश्वसनीय स्त्रोंतों से जानकारी इकट्ठा करते हैं, उनका संदर्भ नोट करते हैं, इसके बाद की तैयारी में हम एक क्रम से आगे बढ़ते हैः

  • आलेख का इंट्रो लिखना – कई बार भूमिका या शुरूआत वाली बात अंत में लिखी जाती है। ताकि हम पूरी सामग्री का एक संक्षिप्त विवरण साझा कर सकें।
  • आलेख का शीर्षक
  • उप-शीर्षक बनाना
  • मुख्य आइडिया और उस आइडिया के सपोर्ट में आने वाले आइडिया को क्रमबद्ध तरीके से लिखना।

रिपोर्ट लिखते समय हमें सवालों को भी लिखना चाहिए जिनके जवाब खोजे जाने हैं या फिर जिन बिंदुओं पर विस्तार से समझ बनाने की जरूरत है ताकि रिपोर्ट पढ़ने वाले को संदर्भ की जानकारी मिल सके। यह बात रिपोर्ट लेखन के संदर्भ में कही गई।

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