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उच्च प्राथमिक विद्यालय दबरई फिरोजाबाद: पुस्कालय की नई किताबें बनीं ‘ख़ुशी का पिटारा’

उत्तर प्रदेश का फिरोजाबाद जिला राजधानी लखनऊ से 250 किलोमीटर दूर स्थित है। रंगबिरंगी चूड़ियों और काँच के बने झूमर के लिए मशहूर इस जिले में प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों की तरफ से होने वाले सकारात्मक प्रयास सहज ही लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं। एक ऐसा ही स्कूल इस फिरोजाबाद जिले के मुख्यालय में स्थित हैप्राथमिक विद्यालय दबरईजो अपने सकारात्मक और नवाचारी प्रयासों के लिए जाना जाता है।

यहाँ के प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका लुबना वसीम ने ने प्रयासों से बच्चों के बीच किताबों की पहुंच सुनिश्चित करने और उनमें पढ़ने की आदत विकास करने के लिए सरकार की तरफ से उपलब्ध कराई गई किताबों का सक्रियता के साथ उपयोग सभी शिक्षकों के सहयोग से कर रही हैं। पुस्तकालय में किताबों का संग्रह बढ़े और उसमें नवीनता लाने के लिए उन्होंनेफ्री लाइब्रेरी नेटवर्क‘ (FLN) से मिली किताबों को भी बच्चों के बीच पहुंचाने का प्रयास किया। इस अनुभव को एजुकेशन मिरर के साथ साझा किया। इस पूरे अनुभव को पढ़िए उन्हीं के शब्दों में।

‘पुस्तकालय में नई किताबों के आने की ख़ुशी’

अपना अनुभव साझा करते हुए लुबना वसीम लिखती हैं, ‘आज जब स्कूल मेंफ्री लाइब्रेरी नेटवर्क’ (FLN) की तरफ से बॉक्स आए तो बच्चों में यह जानने की उत्सुकता थी कि इस बॉक्स के अंदर क्या है? उन्होंने बॉक्स के ऊपर पैनी निगाह बना रखी। जब बॉक्स खुलने के बाद उसमें से नईनई किताबें निकलीं तो बच्चों का उत्साह जरा भी कम नहीं हुआ। इसके विपरीत बच्चों का उत्साह कई गुना बढ़ गया।

सभी बच्चों का अगला प्लान था कि सभी किताबों को डिसप्ले किया जाये ताकि वे सभी किताबों को देख पाएं कि किसकिस तरह की किताबें हैं। सभी बच्चों ने अपनेअपने पसंद कहानी, चित्रों वाली कॉर्टून वाली किताबें लीं और उनके पन्नों को पलटना शुरु किया। बच्चों को इन किताबों के संग्रह में से गणित की प्रेक्टिस वाली किताब बेहद पसंद आई क्योंकि इसमें पहेलियां और सुंदर चित्र बने हुए थे।

‘किताबों से बच्चों के जुड़ाव से मिला उत्साह’

उन्होंने आगे लिखा, “अपनी पसंद की किताब के भीतरी पन्नों को पलटने और ग़ौर से देखने का काम भी कुछ बच्चे कर रहे थे। सबसे अच्छी बात बच्चों में किताब देखने और पढ़ने की ललक थी। बच्चों द्वारा अपनी किताबों को बाद में पढ़ने के लिए संभालकर रखने वाली बात ग़ौर करने वाली थी। इस लम्हे का सबसे सुखद पहलू था कि बच्चे दूसरे की हाथों में मौजूद किताबों को देखकर टिप्पणी कर रहे थे। इस संदर्भ में बच्चों की ग़ौर करने वाली टिप्पणी थी, आज तो सच में मजा गया मैम। आप कल भी हमें बुक्स देना। एक अन्य बच्चे ने कहा कि मैम आप मुझे वह वाली बुक देना।बच्चों की इस ख़ुशी और उत्साह ने मुझमें भी नई गतिविधियों को करने का जोश और उत्साह भर दिया।

“एक प्रधानाध्यापक के रूप में लुबना वसीम विद्यालय में पढ़ने की संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए जिस तरह का नेतृत्व प्रदान कर रही हैं, वह काबिलग़ौर है। ऐसे प्रयासों का विस्तार और बच्चों तक किताबों के पहुंच की निरंतरता सुनिश्चित करने की दिशा में ऐसे प्रयास बेहद महत्वपूर्ण हैं।

क्या है FLN?

फ्री लाइब्रेरी नेटवर्क (FLN) का संक्षिप्त परिचय: फ्री लाइब्रेरी नेटवर्क (FLN) की शुरूआत कोविड-19 की परिस्थितियों के बीच 2019-20 में हुई। इसका उद्देश्य था कि पुस्कालय के क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाएं, पुस्तकालय से जुड़े लोग और विशेषज्ञ सहयोग की भावना के साथ संसाधनों को साझा करने भागीदारी करने के लिए आपस में जुड़ सकें। सभी लोगों तक किताबों की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए पुस्तकालय बने और पढ़ने की राह में आने वाली सभी बाधाएं दूर हों, सभी को पढ़ने का अधिकार मिले ( #RightToRead) ‘फ्री लाइब्रेरी नेटवर्कइस विज़न के साथ काम कर रहा है। इस मुहिम के बारे में ज्यादा विस्तार से जानने के लिए आप यहाँ क्लिक कर सकते हैं।

(आप एजुकेशन मिरर को फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो कर सकते हैं। अपने लेख, शिक्षा से जुड़े अनुभव और सुझाव भेजने के लिए ई-मेल करें educationmirrors@gmail.com पर और ह्वाट्सऐप पर जुड़ें 9076578600 )

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