एक कक्षा-एक पुस्तकालय: बनती ईंटों के बीच उगते सपने
ईंट-भट्टों की बस्तियों में कम संसाधनों के बीच बच्चों तक किताबें पहुँचाने और पढ़ने के प्रति चाव पैदा करने की पहल बताती है कि सीखने की लौ कहीं भी जलाई जा सकती है। — रवि कांत
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ईंट-भट्टों की बस्तियों में कम संसाधनों के बीच बच्चों तक किताबें पहुँचाने और पढ़ने के प्रति चाव पैदा करने की पहल बताती है कि सीखने की लौ कहीं भी जलाई जा सकती है। — रवि कांत
इस लेख में रवि कांत जी ने जोड़ के पैटर्न वाली गलतियों पर आधारित लेख का विश्लेषण करते हुए, सोचने की एक नई दृष्टि और समझ का रास्ता खोला है। जरूर पढ़ें और अपने विचार भी साझा करें।
बच्चों की जोड़ की गलतियों में छुपा है एक पैटर्न — क्या आप उसे समझ सकते हैं?
खेल,खोज और गतिविधि आधारित शिक्षण प्राथमिक कक्षाओं में बच्चों के सीखने की मजबूत बुनियाद का निर्माण करता है। पढ़िए एक रचनात्मक अनुभव।
इस कविता को पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाली सिद्धि हैं, वे पी एम श्री केंद्रीय विद्यालय, एयर फोर्स स्टेशन बागडोगरा में पढ़ रही हैं।
अरविन्द कुमार सिंह कहते हैं कि बच्चों के द्वारा पिछले वर्ष की गई रचनात्मक गतिविधियों पर रिफलेक्शन को 2026 के कैलेंडर का आधार बनाया गया है।
गौरव सर कक्षा-कक्ष में प्रभावी शिक्षण, तकनीक के उपयोग और समुदाय के साथ संवाद से बच्चों की शिक्षा को एक मजूबत आधार प्रदान कर रहे हैं। पढ़िए उनकी कहानी।
शिक्षिका मनीषा प्रसाद जी का कहना है कि सामाजिक बदलाव के लिए बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देना जरूरी है। इसकी पहल परिवार और विद्यालय दोनों स्तरों पर करनी चाहिए।
हाँस सांडे की किताब “आ जाओ अब रात” जीवन, मृत्यु और बचपन की भावनाओं को बेहद संवेदनशील तरीके से छूती है।
शिक्षिका अजिता श्रीवास्तव ने वचनों का 'जादुई बगीचा' गतिविधि के माध्यम से एक वचन और बहुवचन पर काम करने का रोचक अनुभव साझा किया है।