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पुस्तकालय अभियानः ‘बंद स्कूलों के दौर में, खुली किताबों से है उम्मीद’

वर्तमान में कोविड-19 के वायरस के कहर की कहानी वैक्सीन के इंतज़ार वाले मोड़ से आगे बढ़ चुकी है। सबसे ‘भरोसेमंद’ कौन सी वैक्सीन है इसका जवाब भी क्लीनिकल ट्रायल वाले फेज़ के बाद के आँकड़ों से बिल्कुल स्पष्ट हो जायेगा। मार्च 2020 के दूसरे सप्ताह से बंद स्कूल खुल गये हैं। लेकिन अभी अधिकांश प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों का आना हो रहा है। जबकि बच्चे अभी भी स्कूल से दूर घर और वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर विकसित ‘मोहल्ला क्लास’ व घर पर पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में किताबों के साथ उनके जुड़ाव को मजबूत करने के लिए लाइब्रेरी की कहानी, कविता, नाटक, लोककथा व अन्य किताबों तक उनकी पहुंच को मोहल्ला क्लास में सुनिश्चित करना एक अच्छी पहल होगी।

उत्तराखंड राज्य से लाइब्रेरी की मुहिम को विस्तार देने वाले नानकमत्ता पब्लिक स्कूल के पुस्तक प्रेमी विद्यार्थियों जैसे रिया, दीपिका के प्रयास वाली तस्वीरें एजुकेशन मिरर के पास नियमित रूप से आ रही हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में मोबाइल लाइब्रेरी चलाने व लाइब्रेरी मेला लगाने जैसे सराहनीय हो रहे हैं। बच्चों तक किताबों की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए हम क्या-क्या कर सकते हैं? इस बात को हम 10-11 बिन्दुओं में समझने की कोशिश करेंगे।

  1. अपने विद्यालय में मौजूद किताबों की बच्चों के मोहल्ला क्लास या नजदीकी जगह तक पहुंच सुनिश्चित करें।
  2. बच्चों को खूब सारी कहानियां पढ़कर सुनाएं।
  3. कहानी सुनाने के बाद बच्चों से कहानी के पात्रों पर चर्चा करें कि कहानी में कौन-कौन से लोग थे? उनमें से कौन सा पात्र और उसका व्यवहार आपको पसंद आया।
  4. कहानी को बच्चों को अपने शब्दों में सुनाने का मौका दें।
  5. कहानी को शुरू से लेकर मध्य और अंत तक लाने की प्रक्रिया पर भी बात करें। ताकि बच्चे कहानी की क्रमबद्धता को पकड़ पाएं।
  6. कविताओं की किताबों का खूब इस्तेमाल करें और बच्चों को कविताएं पढ़कर सुनाएं।
  7. इसके बाद फिर बच्चों के साथ कविताओं को सामूहिक रूप से करें।
  8. कविता की एक पंक्ति लिखें और बच्चों को मौखिक रूप से या लिखकर उस कविता को आगे बढ़ाते हुए अपनी-अपनी कविता बनाने का मौका दें।
  9. बच्चों को एक गोल घेरे में बैठने के लिए कहें और उनको एक वाक्य देकर कहानी बनाने के लिए कहें। हर अगले बच्चे को एक नया वाक्य बोलना है ताकि कहानी आगे बढ़ सके। यह प्रक्रिया उनको कहानी बनने की रोचक यात्रा से रूबरू करायेगी।
  10. दसवीं सबसे जरूरी बात है कि बच्चों को रोज़ाना नियमित रूप से किताबें पढ़ने का 25-30 मिनट जरूर दें।
  11. अगर आप मैनेज कर सकते हैं तो एक रजिस्टर में बच्चों का नाम और किताब का नाम तथा उस दिन की तिथि अंकित करके बच्चों को घर से भी पढ़ने के लिए किताबें दें। किताबों के लेन-देन की इस प्रक्रिया में आप बड़े बच्चों की मदद ले सकते हैं।

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