चर्चा मेंः ई-कंटेंट और ऑडियो-वीडियो कंटेंट को समझने के लिए बदलें अपनी ‘पठन रणनीति’

वर्तमान में विविध तरह के ई-कंटेंट और डिजिटल का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही साथ हमारे पास पहले से पठन सामग्री मौजूद है। खुद के अपडेट रखने के लिए पढ़ना भी जरूरी है। ऐसे में हमें तय करना होगा कि किसी सामग्री को पढ़ने के लिए सबसे बेहतर रणनीति क्या है? उदाहरण के तौर पर जो सामग्री ज्यादा टेक्निकल है और उसे आपको कक्षा-कक्ष में इस्तेमाल करना है। ऐसी सामग्री को व्यावहारिक शब्दावली में समझने का प्रयास करें। ऐसा करते समय केवल कठिन शब्दों की बजाय प्रक्रिया को ज्यादा महत्व दें।

किसी लेख/वीडियो/ई-कंटेंट में जो लिखा हुआ है उसे किसी उदाहरण में फिट करके देखें कि उसका भाव पूरी तरह आ रहा है या नहीं। तकनीकी चीज़ों को ज्यादा बेहतर ढंग से समझने के लिए आपस में चर्चा करना एक अच्छी रणनीति है। इसलिए जरूरी है कि छोटे-छोटे समूह में उन मुद्दों पर चर्चा करें और अपनी समझ को बेहतर बनाने का प्रयास करें। अपनी बातों को ऐसी भाषा में व्यक्त करें जो सहजता से लोगों की समझ में आ जाये।

सरसरी निगाह से पढ़ने की जरूरत

ध्यान रखें कि जो सामग्री बहुत दीर्घकाल के लिए उपयोगी नहीं है, उसको सरसरी निगाह से देखना पर्याप्त होगा। उसको तेज़ी से पढ़ते हुए प्रमुख बिंदुओं को बेहत संक्षेप में नोट कर लें। ताकि आपके पास उस सामग्री तक दोबारा पहुंचने के लिए कीबर्ड्स के रूप में एक रिफरेंस मौजूद रहे। इसके साथ ही साथ खुद के पढ़े गये लेखों, कोर्सेज़ को कहीं लिस्ट में दर्ज़ करते रहें। इससे उसके बारे में दोबारा बात होने पर आप चीज़ों को फिर से पलटकर देख सकें।

सेवाकालीन प्रशिक्षण की जरूरत को समझें

हमेशा ध्यान रखें कि सेवाकालीन प्रशिक्षण या तैयारी बीएड, डीएलएड या बीएलएड अथवा एमए एजुकेशन की परीक्षा की तरह से नहीं है। जहाँ आप सवालों के जवाब को बोल-बोलकर और लिखकर जवाब की तैयारी करते हैं। ताकि परीक्षा के समय उसे जैसे का तैसा लिखकर या मौखिक परीक्षा में जवाब देकर आप अच्छे अंक या ग्रेड हासिल कर सकें। सेवाकालीन प्रशिक्षण में सीखी गई चीज़ को स्कूल में करके दिखाने की अपेक्षा होती है। ताकि बच्चों के साथ इस्तेमाल होने वाली शिक्षण विधि, सीखने-सिखाने के तरीके, बच्चों के अधिगम स्तर, शिक्षण के दौरान टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को बेहतर ढंग से उपयोग करते हुए शैक्षिक उपलब्धि को हासिल किया जा सके।

प्रमुख अवधारणाओं व उसके आपसी संबंधों को समझें

जो प्रमुख या कोर कांसेप्ट या अवधारणा है वह ज्यों कि त्यों रहती है। इसमें नीतिगत परिवर्तन के बाद ही बदलाव होते हैं। जैसे शिक्षा का उद्देश्य वही रहता है, लेकिन उसको लेकर हमारी समझ समय के साथ अपडेट होती है। कई बार नीतिगत परिवर्तन के बाद भी चीज़ों को देखने-समझने का नजरिया शिफ्ट होता है। जैसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के बाद स्कूल रेडिनेस या शाला पूर्व तैयारी और आधारभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान को विशेष महत्व दिया जा रहा है। लेकिन ऐसे में भी हमें सजग रहने की जरूरत है कि रेमेडियल टीचिंग की मेनस्ट्रीमिंग न होने लगे क्योंकि अगर ऐसा होता है तो पढ़ने में अपेक्षाकृत कमज़ोर बच्चों को तो इसका फायदा मिलेगा। लेकिन बाकी बच्चे इस दौरान होने वाली उपेक्षा और उदासीनता के कारण प्रभावित होंगे। ऐसी सतर्कता शिक्षा के बहुआयामी स्वभाव और किसी भी तरह के बदलाव के विविध संभावित परिणामों पर ध्यान देने से पता चलती है।

आखिर में मैसेज यही है कि तेजी से पढ़िए, अपने बड़े काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटें, सबसे मुश्किल काम को सबसे ऊर्जावान समय में करें। अपेक्षाकृत आसान काम को अन्य जगहों पर शामिल करके अपनी मुश्किल को आसान बना सकते हैं। अगर आप तकनीक के साथ बहुत ज्यादा सहज नहीं हैं तो शॉफ्ट की बजाय प्रिंट लेकर डॉक्युमेंट्स को पढ़ें। अपने नोट्स और अवलोकन को नोट करें। इसके ऊपर चिंतन करें और फिर कोई मुकम्मल राय बनायें। इससे आपको अपने काम को सुगम बनाने और खुद को फोकस रखने में मदद मिलेगी। आखिर में सभी विचारों को आप संक्षेप में पढ़ सकते हैं।

पाँच ख़ास बातें

  1. अपने पूर्व ज्ञान व अनुभव का उपयोग करके नये विचारों को समझें
  2. अनुमान लगाएं कि जो सामग्री आप देखने/पढ़ने जा रहे हैं वह किस बारे में हैं
  3. कंटेंट के मुख्य विचार को समझें और उसे अपने शब्दों में साझा करें
  4. कंटेंट को देखने के बाद मन में उठे सवालों पर ध्यान दें
  5. किसी सामग्री से गुजरने के बाद जो विचार आपको मिले हैं, उसको कैसे इस्तेमाल करेंगे इसके व्यावहारिक तरीकों पर समझ बनाने के लिए खुद विचार करें और अन्य लोगों से चर्चा भी करें।

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