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शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

मुंबई: परेल भोईवाडा मराठी शाला में ‘डिजिटल बदलाव’ की प्रेरक कहानी

मुंबई स्थित परेल भोईवाडा मनपा मराठी शाला में 'डिजिटल शिक्षा में बदलाव' की यह कहानी बताती है कि परिवर्तन हमेशा बड़े शहरों के बड़े स्कूलों से नहीं, एक छोटे से क्लासरूम से शुरू होता है।

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आज का समय डिजिटल क्रांति का दौर है, जहाँ शिक्षा भी परंपरागत तरीकों से आगे बढ़कर तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है। ऐसे समय में मुंबई स्थित परेल भोईवाडा मनपा मराठी शाला ने डिजिटल शिक्षा को अपनाकर एक नई मिसाल कायम की है। इस परिवर्तन के केंद्र में हैं समर्पित शिक्षक गौरव कर्डिले सर, जो बच्चों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से न सिर्फ पढ़ा रहे हैं, बल्कि उन्हें भविष्य के लिए तैयार भी कर रहे हैं।

इस लेख में
  1. डिजिटल शिक्षा का सशक्त माध्यम
  2. बच्चों में बढ़ती रुचि और सीखने के समान अवसर
  3. प्राचार्य का मार्गदर्शन: सफलता की नींव
  4. भविष्य की ओर एक मजबूत कदम

डिजिटल शिक्षा का सशक्त माध्यम

गौरव कर्डिले सर ने शिक्षण पद्धति में डिजिटल साधनों का प्रभावी उपयोग शुरू किया है। स्मार्ट बोर्ड, प्रोजेक्टर, शैक्षणिक ऐप्स और इंटरैक्टिव वीडियो के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। इससे कठिन विषय भी सरल और रोचक बन जाते हैं। जहाँ पहले बच्चे किताबों तक सीमित रहते थे, वहीं अब वे ऑडियो-विज़ुअल माध्यम से विषयों को बेहतर समझ पा रहे हैं। गणित, विज्ञान और भाषा जैसे विषयों को डिजिटल प्रस्तुति के जरिए जीवंत बनाया जा रहा है।

बच्चों में बढ़ती रुचि और सीखने के समान अवसर

डिजिटल शिक्षा का सबसे बड़ा लाभ यह है कि बच्चों की पढ़ाई में रुचि बढ़ी है। वे अब केवल सुनते नहीं, बल्कि देखते, समझते और खुद सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भाग लेते हैं। गौरव सर बच्चों को प्रश्न पूछने, चर्चा करने और खुद से उत्तर खोजने के लिए प्रेरित करते हैं। इससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है।

मुंबई महानगरपालिका ने अपने सभी विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा के लिए आवश्यक आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराकर शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसी पहल को सशक्त बनाते हुए, गौरव कर्डिले सर का यह प्रयास विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण, नवाचारी और प्रभावी शिक्षा पहुँचाने का माध्यम बन रहा है।

प्राचार्य का मार्गदर्शन: सफलता की नींव

इस पूरे प्रयास को सफल बनाने में विद्यालय के प्राचार्य श्री कांताराम खंडवी सर का महत्वपूर्ण योगदान है। उनका दूरदर्शी नेतृत्व और शिक्षा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण ही इस बदलाव की नींव है। उन्होंने शिक्षकों को नवाचार के लिए प्रेरित किया और विद्यालय में डिजिटल संसाधनों को उपलब्ध कराने में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने अपने विद्यालय के सभी शिक्षकों के साथ मिलकर एक टीम के रूप में काम किया और चुनौतियों को समाधान के अवसर में बदल दिया। 

भविष्य की ओर एक मजबूत कदम

डिजिटल शिक्षा केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आज की आवश्यकता बन चुकी है। परेल भोईवाडा मनपा मराठी शाला में हो रहा यह प्रयास अन्य विद्यालयों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। यह पहल यह दर्शाती है कि यदि शिक्षक समर्पित हों और नेतृत्व सशक्त हो, तो सीमित संसाधनों में भी बड़ा बदलाव संभव है।

गौरव कर्डिले सर और कांताराम खंडवी सर के मार्गदर्शन में यह विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में एक नई दिशा दिखा रहा है। डिजिटल माध्यम से बच्चों को सशक्त बनाकर उन्हें एक उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर किया जा रहा है। यह कहानी केवल एक विद्यालय की नहीं, बल्कि उस बदलाव की है जो पूरे शिक्षा तंत्र को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकता है।

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