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भाषा शिक्षणः ‘धारा प्रवाह पठन’ बढ़ाने के 7 टिप्स

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संतुलित अप्रोच में पहले अक्षरों व मात्राओं की पहचान पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है।

भाषा शिक्षण का एक लक्ष्य है कि बच्चे बग़ैर अटके किसी पाठ का धारा-प्रवाह पठन कर पाएं और उससे जुड़े हुए सवालों का जवाब दे पाएं। धारा-प्रवाह पठन और समझने के बीच एक सकारात्मक संबंध है।

कोई बच्चा जितनी आसानी से धारा-प्रवाह पठन कर पाता है, इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि वह संबंधित पाठ से जुड़े सवालों का अगर वह बच्चे के परिवेश और अनुभव के दायरे की पहुंच में है। बच्चों के अटक-अटक कर पढ़ने वाली स्थिति में क्या करें? इस बारे में एजुकेशन मिरर के लिए यह पोस्ट लिखी है भरत सिंह भाटी ने।

प्रतीक चिन्हों की पहचान

यह सुनिश्चित करें की जो पाठय सामग्री बच्चा पढ़ रहा है, उसमें आने वाले सभी प्रतीकों की पहचान बच्चों को हो। क्योकि अगर 1या 2 वर्ण भी बच्चे को नही आते है और वो ही कहानी में बार -बार आ जाये तो बच्चा रूक जाता है जिससे धारा-प्रवाह पठन प्रभावित होता है

शब्द को शब्द की तरह पढना

पठन कौशल का विकास, पढ़ने की आदत, भारत में प्राथमिक शिक्षा की स्थिति, अर्ली लिट्रेसी

पुस्तकालय में ज्यादा समय तक पढ़ने वाले बच्चे अटक-अटक कर पढ़ने वाली स्थिति से जल्दी बाहर आ जाते हैं।

शुरूआती स्तर पर शिक्षक बच्चों को वर्ण मिलाकर शब्द बनाने का अभ्यास करवाते हैं जैसे – म द न  मदन । लेकिन इसमें बहुत जरूरी होता है कि शिक्षक एक स्तर के बाद बच्चो  को शब्द को शब्द की तरह पढने का अभ्यास कराये जैसे  मदन  कमल  रतन । मैने अपने 10 विधालय के शिक्षको के साथ इसको लेकर योजना बनाकर कार्य किया जिससे कक्षा 1 के बच्चों ने शुरूआत से ही शब्द को शब्द की तरह पढना शुरू कर दिया।

स्वतंत्र पठन के खूब अवसर दें

अध्यापक ने जो भी पढाया है उस पर बच्चों को स्वतंत्र अभ्यास करने का अवसर दें। इससे विषयवस्तु की पुख्ता पहचान तो होती ही है साथ ही बच्चों में पढने का आत्मविश्वास भी बढता है।

पुस्तकालय को जीवंत बनाएं

कक्षा शिक्षण के अलावा बच्चों को पुस्तकालय में उनके स्तर की पुस्तकें पढने के लिए देने से बच्चों में पुस्तकों के प्रति रूचि बढेगी। आकर्षक चित्रों से प्रभावित होकर बच्चे लिखे हुए को पढकर कहानी समझने का प्रयास भी करते है। बच्चों को पुस्तकें घर ले जाने के लिए भी उपलब्ध करवायें। सत्र 2016-17 में मैने देखा कि जिन बच्चों को पुस्तकालय में पढने का अधिक अवसर मिला वो बच्चे अधिक अच्छे से धारा प्रवाह पठन कर पा रहे हैं और समझ के साथ पढ़ रहे हैं।

शिक्षक द्वारा ‘रीड अलाउड’ है उपयोगी

बच्चों में धारा प्रवाह पठन क्षमता बढाने के लिए जरूरी है कि अध्यापक रोज एक कहानी (पाठ्य पुस्तक से या पुस्तकालय से) धारा प्रवाह (उचित गति,शुद्धता, व हावभाव ) के साथ पढकर सुनाएं।

समझ के साथ पढ़ने को दें प्रोत्साहन

किताब पढ़ते बच्चे

शब्दकोश में छपे चित्रों पर चर्चा करते स्कूली बच्चे। ऐसे अभ्यास समझ के साथ पढ़ने को बढ़ावा देते हैं।

धारा प्रवाह पठन हेतु पढ़े हुए को पाठ को समझना बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसी से बच्चों की रूचि व जिज्ञासा बनी रहती है। शुरूआती स्तर पर बच्चे सिर्फ डिकोडिंग कर रहे होते है और समझना कम होता है। इसी कारण वो ज्यादा समय तक किसी पाठ को पढ नही पाते क्योंकि यह उन्हें नीरस लगता है। इस दौरान अध्यापक बच्चों की पढकर समझने की क्षमता बढाने में मदद करें जैसे -जैसे समझ बढेगी बच्चे अधिक धारा प्रवाह के साथ पढने लगेंगे।

एक बच्चे की कहानी

इस बात को में अपने एक अनुभव के माध्यम से बताना चाहता हूँ नचे कपूरिया (बापिणी,जोधपुर) में कक्षा 2 का बच्चा है सांग सिंह जो शब्दों को तोड़-तोड़कर पढता था ,जैसे  क म ल  कमल । जबकि उसे सभी वर्ण मात्राओं की पहचान थी। मैं उस बच्चे के पास सरल स्तर की पुस्तकालय की पुस्तकें लेकर बैठा और उससे पढवाया तो वह अटक -अटक कर पढा।

फिर मैने उसी पुस्तक को पढकर वाक्य दर वाक्य अर्थ भी बताया और फिर दोबारा उसी पुस्तक को बच्चे से पढवाया। इस बार बच्चे ने सरल शब्दों को शब्द की तरह पढा जैसे –  कम ,घर आदि। यह अभ्यास मैंने तीन पुस्तकों के साथ करवाया। उस दिन बच्चा सरल शब्द व एक मात्रा वाले शब्दों को साथ पढने का प्रयास करने लगा। फिर मैने शिक्षक को इस बारे मे बताया और उनसे बातचीत हुई कि वह रोजाना 5-10 मिनट इस तरह का अभ्यास करवाये। माह के अंत मे जब में उस विद्यालय में गया तो मैने देखा कि सांग सिंह अपने स्तर की पुस्तकों को धारा प्रवाह के साथ पढ रहा था। इससे प्रभावित होकर मैने अन्य शिक्षकों के साथ भी इस तरह की योजना बनाई।

bharat-bhati(लेखक परिचयः भरत सिंह भाटी राजस्थान के जोधपुर ज़िले में रूम टू रीड के अर्ली लिट्रेसी प्रोग्राम में बतौर लिट्रेसी कोच काम कर रहे हैं। वे पिछले कुछ वर्षों से प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में पढ़ने के कौशल और पढ़ने की आदत के विकास के लिए सक्रियता से काम कर रहे हैं। एजुकेशन मिरर के लिए यह उनकी पहली पोस्ट है।)

(आप एजुकेशन मिरर से फ़ेसबुकएक्स और यूट्यूब पर जुड़ सकते हैं। रेगुलर अपडेट के लिए हमारे  WhatsApp चैनल को फॉलो करें। आप अपने लेख, अनुभव, विचार हमें ईमेल कर सकते हैं educationmirrors@gmail.com पर।)

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RAJ RANI

it is very good method of teaching i liked it

Virjesh Singh

Thank you very much Raj Rani ji. Keep reading and Sharing your views.

Virjesh Singh

इसका श्रेय भरत जी की पोस्ट को जाता है। बहुत अच्छे से उन्होंने पढ़ना सीखने और धारा प्रवाह पठन की दिशा में बढ़ने से जुड़े उपयोगी बिंदुओं को अपनी पोस्ट में शामिल किया है। आपकी बात बिल्कुल सही है कि बच्चे शब्दों का अर्थ वाक्य के भीतर अच्छे से समझ पाते हैं। अलग से शब्दों का अर्थ रटने के लिए इसीलिए बहुत ज्यादा फ़ायदे नहीं हैं, असली फ़ायदा तब है जब पढ़ते हुए शब्दों का अर्थ समझा जाए और उसे अपनी जरूरत के अनुसार सहज ढंग से इस्तेमाल किया जाए।

Anonymous

Sir your method is so effective.
…..because each language having a structure.(S+v+ob).
As my best of knowledge children easily understand words meaning in the sentence form to separate word.

Virjesh Singh

Thank you so much for your words. This gives inspiration to continue this journey.

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