भाषा शिक्षण: समझ के साथ पढ़ने में कैसे मदद करते हैं पूर्व ज्ञान और अनुभव?
पढ़ना केवल शब्दों को देखना नहीं है, बल्कि उन्हें समझना है और यह समझ तभी बनती है जब पाठक अपने पूर्व ज्ञान और अनुभवों को सक्रिय रूप से पाठ से जोड़ पाता है।
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पढ़ना केवल शब्दों को देखना नहीं है, बल्कि उन्हें समझना है और यह समझ तभी बनती है जब पाठक अपने पूर्व ज्ञान और अनुभवों को सक्रिय रूप से पाठ से जोड़ पाता है।
इस बेहद आसान से सवाल के जवाब में क्या उत्तर आपके मन में आते हैं? शेष पढ़िए इस पोस्ट में।
भाषा शिक्षण में शब्द पठन अर्थ की तरफ बढ़ने वाली दूसरी सीढ़ी होती है।
इस बारे में प्रोफ़ेसर रमाकांत अग्निहोत्री कहते हैं कि हमें बच्चों के सीखने की क्षमता पर भरोसा करना चाहिए।
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