बस्ती जिले के एक प्राथमिक विद्यालय में अपनी पहली स्कूल विजिट के दौरान मेरी मुलाक़ात पायल से हुई। पायल बहुत शांत स्वभाव की बच्ची थी। वह विद्यालय नियमित रूप से नहीं आ पाती थी। आकलन के दौरान वह प्रश्नों के उत्तर देने में झिझक रही थी और लिखने में भी उसे कठिनाई हो रही थी।
मैंने सहज भाव से उससे पूछा, “बेटा, आप रोज़ स्कूल क्यों नहीं आतीं?” पायल ने कोई जवाब नहीं दिया। शायद उसकी चुप्पी में संकोच था, या यह डर कि कहीं डाँट न पड़ जाए। तब मैंने बात की दिशा बदली और उसे प्रोत्साहित करते हुए पूछा, “अच्छा, यह बताओ, आप बड़ी होकर क्या बनना चाहती हो?”
इस बार बहुत धीमी आवाज़ में जवाब आया, “डॉक्टर बनूँगी।”
चुप्पी के पीछे छिपा सपना
उसका जवाब सुनकर मुझे लगा कि इस शांत बच्ची के मन में भी एक बड़ा सपना पल रहा है। उसे बस सही मार्गदर्शन, भरोसे और प्रोत्साहन की ज़रूरत है। मैंने उससे कहा, “बेटा, डॉक्टर बनने के लिए आपको रोज़ स्कूल आना होगा और मन लगाकर पढ़ना होगा। पढ़-लिखकर आप अपना सपना पूरा कर सकती हो, बीमार लोगों का इलाज कर सकती हो और अपने मम्मी-पापा का नाम रोशन कर सकती हो। पढ़ाई ही आपको अपनी पसंद का जीवन चुनने की ताक़त देगी।”
विद्यालय के साथ मिलकर
केवल एक बातचीत काफ़ी नहीं थी। इसलिए मैंने प्रधानाध्यापक जी और कक्षा-शिक्षक से अनुरोध किया कि वे पायल को खेल-आधारित गतिविधियों के माध्यम से सीखने के अवसर दें। वे उससे प्यार से बात करें और उसके छोटे-छोटे प्रयासों की सराहना करें। इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ेगा और पढ़ाई में उसकी रुचि जागेगी।
बदलाव की आहट
कुछ समय बाद मैंने दोबारा विद्यालय का विजिट किया। प्रधानाध्यापक जी ने ख़ुशी के साथ पायल में आए बदलाव के बारे में बताया। अब पायल नियमित रूप से विद्यालय आने लगी है और उसने लिखना भी शुरू कर दिया है।
सबसे सुखद बात यह थी कि पायल को रोज़ स्कूल जाते देखकर आस-पड़ोस के दूसरे बच्चे भी नियमित रूप से विद्यालय आने लगे। पायल का बदलाव केवल उसकी अपनी प्रगति तक सीमित नहीं रहा। एक बच्ची की नियमित उपस्थिति कई बच्चों के लिए प्रेरणा बन गई।
इस अनुभव से मिली सीख
यह सुनकर मुझे बहुत ख़ुशी हुई और काम करने की नई ऊर्जा मिली। इस अनुभव ने मुझे फिर से याद दिलाया कि किसी बच्चे की चुप्पी को उसकी कमज़ोरी नहीं समझना चाहिए। बच्चों से जुड़ना, उनके सपनों को समझना और उन्हें प्यार से सही दिशा दिखाना बहुत ज़रूरी है। कभी-कभी हमारी एक छोटी-सी बातचीत भी बच्चे के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।
पायल की यह प्रगति मेरे लिए एक बड़ी उपलब्धि और प्रेरणा है। इससे मेरा यह विश्वास और मज़बूत हुआ कि हर बच्चे में आगे बढ़ने की क्षमता होती है। ज़रूरत है तो बस उसे समझने, प्रोत्साहित करने और सही अवसर देने की।
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लेखक परिचय: अमन कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में प्राथमिक विद्यालयों के साथ काम कर रहे हैं। भाषा और गणित में बच्चों के सीखने की वर्तमान स्थितियों को समझना और उसके कारणों को जानने में अमन की विशेष रुचि है। अमन ने कक्षा-कक्ष में शिक्षण के अलावा अन्य कारणों पर भी ग़ौर किया है, जो बच्चों के सीखने को प्रभावित करते हैं।)
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