डायरी: चाक-डस्टर, ब्लैकबोर्ड और संवाद: अध्यापन के एक दशक का आत्मीय सफर
अरविंद कुमार सिंह लिखते हैं, "पिछले दस वर्षों में अध्यापन ने मुझे जितना बच्चों को सिखाने का अवसर दिया, उससे कहीं अधिक स्वयं सीखने का अवसर दिया है। इस यात्रा ने मेरी कक्षा, बच्चों और सीखने को देखने की दृष्टि बदल दी। यह लेख उन्हीं अनुभवों, संवादों और सीखों का आत्मीय लेखा-जोखा है, जिन्होंने मुझे हर दिन एक बेहतर शिक्षक और बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा दी।" [...]