पुस्तक चर्चा: नाच पढ़ते हुए लगा, “यह तो मेरी ही कहानी है”

‘नाच’ पुस्तक के लेखक हैं नवनीत नीरव और मधुबनी शैली में इसका बेहतरीन चित्रांकन किया है नरेश पासवान ने। यह किताब एकलव्य प्रकाशन, भोपाल से प्रकाशित हुई है। 2025 में प्रकाशित इस कहानी ने पाठकों को लोक कलाकारों के जीवन के एक नए पहलू से रूबरू कराया है, जिसमें लोक कला के लिए समर्पित कलाकार की आंतरिक मनःस्थिति का बयान है। इस कहानी को पढ़ने के बाद असम के माजूली से लोक कलाकार राकेश पेगू ने किताब को पढ़ने के बाद अपने अनुभवों को लिखकर साझा किया है। पढ़िए उन्हीं के शब्दों में..
आमतौर पर मैं दिन में खाली समय में हमेशा किताबों से दोस्ती कर लेता हूँ। मुझे ज़्यादातर पिक्चर वाली किताबें पढ़ना पसंद है। एक दिन मुझे ऐसी ही एक किताब मिली। उस किताब का नाम है “नाच”। वैसे यह चित्रकथा नहीं बल्कि एक उपन्यास है। लेकिन जैसे ही मैंने किताब देखी, मेरे मन में एक सवाल आया: “नाच” का क्या मतलब है? किताब के कवर ने मुझे बहुत क्यूरियस कर दिया।
मैंने धीरे-धीरे पन्ने पलटे और पढ़ना शुरू किया। इसकी कहानी मुझे बहुत प्यारी लगी। मुझे पढ़ते हुए लगा कि जैसे लेखक नवनीत नीरव ने यह किताब सिर्फ़ मेरे लिए लिखी है। बस उन्होंने मेरा नाम बदलकर सरोज का नाम रख दिया। मैं अपनी फीलिंग्स किसी से शेयर नहीं कर पा रहा था। आज इस किताब ने मुझे गर्व से यह कहने की हिम्मत दी है कि मैं डांस और एक्टिंग कर सकता हूँ।
जब “नाच” ने मुझे मुझसे मिलवाया
किताब की कहानी ने मेरे दिल को छू लिया। मुझे बचपन से ही डांस और एक्टिंग पसंद है। श्री कृष्ण रास लीला में फीमेल कैरेक्टर्स निभाना और फीमेल कॉस्ट्यूम पहनकर सत्रिया डांस करना, साथ ही फोक डांस और मॉडर्न डांस करना, मेरे पसंदीदा शगल हैं। पर जैसे इस कहानी के प्रमुख किरदार सरोज के साथ होता है वैसा ही मेरे साथ भी हुआ। मेरे परिवार और समाज ने कभी मेरे इस डांस करने को आसानी से नहीं लिया। कभी भी गाली-गलौज और मज़ाक के अलावा कोई जवाब नहीं मिला। फिर भी मैं रुका नहीं। एक दिन, सरोज की तरह मुझे भी घर छोड़ना पड़ा। मैंने टीचर की बात सुनी और धीरे-धीरे अपने काम में आगे बढ़ गया।
इस कहानी ने एक बार फिर मुझे वह काम करते रहने की हिम्मत दी है, जो मुझे पसंद है। आपको यह किताब एक बार ज़रूर पढ़नी चाहिए, कहानी बहुत दिलचस्प है! किताब की कहानी और इसमें इस्तेमाल की गई नरेश पासवान की तस्वीरें दोनों ही मज़ेदार हैं।

किताब का शीर्षक : नाच
लेखक : नवनीत नीरव
चित्रकार : नरेश पासवान
प्रकाशक : एकलव्य, भोपाल
वर्ष : 2025
मूल्य : 75 रूपए
(आप एजुकेशन मिरर से फ़ेसबुक, एक्स और यूट्यूब पर जुड़ सकते हैं। रेगुलर अपडेट के लिए WhatsApp चैनल से जुड़ें। आप हमें अपने लेख और अनुभव ईमेल कर सकते हैं educationmirrors@gmail.com पर।)
“राकेश जी की यह समीक्षा पढ़कर लगा कि अच्छी किताबें केवल कहानी नहीं सुनातीं, वे पाठक को उसके अपने जीवन से भी जोड़ देती हैं। अब ‘नाच’ पढ़ने की उत्सुकता और बढ़ गई है। ऐसे आत्मीय और ईमानदार पाठकीय अनुभव साझा करने के लिए धन्यवाद।”