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डायरी: चाक-डस्टर, ब्लैकबोर्ड और संवाद: अध्यापन के एक दशक का आत्मीय सफर

“एक शिक्षक तब तक वास्तव में नहीं पढ़ा सकता, जब तक वह स्वयं लगातार सीख नहीं रहा हो।” रवींद्रनाथ टैगोर का यह कथन मेरे शैक्षणिक जीवन का मूलमंत्र बन चुका है।

इस 9 जुलाई को जब मैं मुड़कर देखता हूँ, तो प्राथमिक विद्यालय की दहलीज पर कदम रखे पूरे 10 साल हो गए हैं। इन 10 वर्षों की लंबी यात्रा ने मुझे केवल एक ‘अध्यापक’ नहीं बनाया, बल्कि मुझे एक संवेदनशील इंसान और निरंतर सीखने वाला विद्यार्थी भी बनाया है। यह एक दशक महज सेवा के दस साल नहीं हैं, बल्कि यह बच्चों के संग हँसने, सीखने, खुद को हर रोज एक नया शिक्षक बनते हुए देखने और अनुभवों की एक समृद्ध किताब लिखने के साल हैं।

एक शिक्षक के रूप में 10 वर्षों की यात्रा 

इस 10 साल की यात्रा को मैं स्पष्ट रूप से दो हिस्सों में देखता हूँ—कोविड-19 से पहले का समय और कोविड-19 के बाद का समय। महामारी के बाद जब स्कूलों में कक्षाएं दोबारा संचालित हुईं, तो वह दौर मेरे जीवन में एक शिक्षक के रूप में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट (मोड़) साबित हुआ। बंद कमरों से निकलकर आए बच्चों की आँखों में एक अजीब सी झिझक थी, जिसे दूर करने के लिए पारंपरिक तरीके काफी नहीं थे। ऐसे समय में ‘रीडिंग कैंपेन’ की गतिविधियों ने मेरी अध्यापन शैली एवं कक्षा शिक्षण की समझ में अमूल-चूल परिवर्तन कर दिया। मैंने महसूस किया कि कक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों को रटने की जगह नहीं, बल्कि संवाद का एक जीवंत मंच है। कक्षाओं में बातचीत के लंबे सत्रों का आयोजन करना और किताबों पर गहन चर्चा करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा बन गया।

अध्यापन के इस वैचारिक विस्तार के दौरान, पिछले कुछ सालों में मुझे बहुत सारा उत्कृष्ट बाल साहित्य जैसे ‘एकतारा’, ‘एकलव्य’ और ‘एनबीटी (NBT) पब्लिकेशन’ की किताबें पढ़ने का मौका मिला। मैंने न केवल इन बेहतरीन पुस्तकों को खुद पढ़ा, बल्कि कक्षा में बच्चों के साथ इन पुस्तकों पर गहनता से कार्य भी किया। बाल साहित्य के इस संग ने बच्चों के भीतर पढ़ने की संस्कृति को जगाया और मेरी भाषाई शिक्षण की समझ को भी एक नया आयाम दिया।

बच्चों के साथ-साथ मेरी  अभिव्यक्ति में आया निखार 

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान बच्चों के साथ-साथ मेरे भीतर का कलाकार और लेखक भी समृद्ध हुआ। इस दौरान मेरी स्वयं की लेखन शैली का बहुत ज़्यादा विकास हुआ है। इसके साथ ही, मैं अपने बचपन के सापेक्ष चित्र बनाने में ज़्यादा कंफर्टेबल (सहज) महसूस करता हूँ और यह भी कह सकते हैं कि मैं पहले की अपेक्षा अब और अधिक साफ़ व स्पष्ट चित्र बना पा रहा हूँ। मेरी चित्रकारी और लेखन में आए इस निखार का पूरा श्रेय भी मेरे छात्र-छात्राओं को ही जाता है, जिन्होंने मुझे हर दिन सृजन के नए धरातल पर सोचना सिखाया।

प्राथमिक विद्यालय बंगला पूठरी, बुलंदशहर में अध्यापक के रूप में कार्य करते हुए मेरी जो समझ विकसित हुई है, उसका सारा श्रेय मेरे विद्यार्थियों को जाता है। इस पूरी शिक्षण यात्रा के अनुभवों और बाल साहित्य पर किए गए कार्यों से मैं यह भली-भांति समझ पाया कि शिक्षक कक्षा में छात्रों के प्रति जितना ज्यादा सजग एवं संवेदनशील होगा, उसके बच्चे उतना ही अच्छा कार्य करेंगे। एक शिक्षक का उद्देश्य मात्र पाठ्य पुस्तकों को पढ़ाना ही नहीं, अपितु अध्ययनरत छात्रों का सर्वांगीण विकास करना है। इस यात्रा में छात्रों से लगातार बात करने से ही मुझे उनकी शैक्षणिक आवश्यकताओं का पता चलता रहा और इसी कारण वे लगातार सीखते भी रहे।

इस सफर में छात्रों ने मेरे साथ बहुत सारी एक्टिविटी कीं। जो यात्रा रीडिंग कैंपेन और DSW (DRAW–SPEAK-WRITE) गतिविधि से शुरू हुई थी, वह हमारे विद्यालय की दीवार पत्रिका “उड़ान” तक जा पहुंची। इस दीवार पत्रिका के लिए छात्र बहुत मेहनत से कहानियां, कविताएं, अपने आत्मीय अनुभव एवं ज्ञानवर्धक लेख लिख रहे हैं। सृजन का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका; बच्चे लगातार ‘चकमक’ जैसी प्रतिष्ठित बाल विज्ञान पत्रिका के लिए भी उत्कृष्ट लेख लिख रहे हैं।

इस अद्भुत 10 वर्षीय जुड़ाव और सीख के लिए मैं अपने छात्रों के प्रति बहुत-बहुत धन्यवाद और आभार व्यक्त करता हूँ। इसके साथ ही, मेरी इस शैक्षणिक यात्रा के साथी रहे एजुकेशन मिरर, एल.एल.एफ (LLF), पाठशाला भीतर और बाहर, सभी शिक्षक साथियों एवं उच्च अधिकारियों का भी हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने हमेशा मेरी इस शैक्षणिक यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए मेरा मनोबल बढ़ाया। मेरा सफर अभी जारी है, और सीखने-सिखाने की यात्रा ऐसे ही गतिमान रहे।

(लेखक परिचय: अरविन्द कुमार सिंह वर्तमान में प्राथमिक विद्यालय बंगला पूठरी, बुलंदशहर में सहायक अध्यापक के रूप में काम कर रहे हैं। आपके विद्यालय से बच्चों के विभिन्न अनुभवों का प्रकाशन विभिन्न पत्र–पत्रिकाओं में हो चुका है। आप शिक्षा को जीवन के अनुभवों से जोड़ने और बच्चों की रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने के लिए सतत प्रयास कर रहे हैं।)

(आप एजुकेशन मिरर से फ़ेसबुकएक्स और यूट्यूब पर जुड़ सकते हैं। अपने लेख हमें ईमेल करें educationmirrors@gmail.com पर।)

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