
जोड़ की गलतियों पर पिछले लेख में हमने देखा कि बच्चों की गलतियाँ बेतरतीब नहीं होतीं, उनके पीछे बच्चे का अपना एक नियम होता है। घटाव में यह बात और भी साफ़ दिखती है, क्योंकि यहाँ “उधार” की अवधारणा बच्चे के लिए नई और अमूर्त होती है। इस लेख में घटाव की आम गलतियों, उनके कारणों और कक्षा में आसानी से अपनाई जा सकने वाली रणनीतियों को समझेंगे।
इस शृंखला का पिछला लेख पढ़ें – 47 + 36 = 713 क्यों लिखते हैं बच्चे?
घटाव की गलती में भी छिपा है एक नियम
एक बच्चा लिखता है, 85 − 19 = 74। पूछने पर वह बताता है: “5 में से 9 नहीं घटता, तो मैंने 9 में से 5 घटा दिया। फिर 8 में से 1 घटाया।” उसकी हर गणना सही है। गलत केवल वह नियम है जो उसने अपने लिए बना लिया: हर कॉलम में बड़े अंक में से छोटा अंक घटाओ।
कक्षा 3 की कॉपियों में यही तस्वीर दिखी। 68 − 23 और 56 − 24 जैसे बिना उधार वाले सवाल ज़्यादातर बच्चों ने सही किए, पर 62 − 38, 70 − 36 और 92 − 57 पर या तो यही नियम लगा, या सवाल खाली छूट गया। कुछ बच्चों ने उधार के निशान तो ठीक लगाए, फिर भी उत्तर गलत रहा। यानी प्रक्रिया की नकल हुई, उसका अर्थ नहीं पहुँचा।

ब्राउन और बर्टन (1978) ने इसी गलती से जुड़ा एक प्रसंग दर्ज किया है। जॉनी ने 437 − 284 = 253 लिखा। शिक्षक ने कहा, “उधार लेते समय 1 घटाना भूल गए।” पर जॉनी ने उधार लिया ही नहीं था; वह हर कॉलम में बड़े में से छोटा घटा रहा था। शिक्षक की बात उसकी समझ से बाहर रही, और उसने खुद को कमज़ोर मान लिया।
घटाव के दौरान ध्यान रखने वाली तीन बातें
- क्रम मायने रखता है: जोड़ में 3 + 5 और 5 + 3 बराबर हैं, घटाव में 8 − 3 और 3 − 8 नहीं। जोड़ से मिली “किसी भी क्रम में कर लो” वाली आदत ही “बड़े में से छोटा” वाले नियम की जड़ है।
- उधार यानी दहाई को तोड़ना: जोड़ में 10 इकाइयों से दहाई बनती है; घटाव में बनी हुई दहाई को तोड़ना पड़ता है। यह उलटा काम बच्चे के लिए ज़्यादा अमूर्त है।
- शून्य का अर्थ: 70 में 0 का मतलब “कुछ नहीं” नहीं, बल्कि “अभी कोई खुली इकाई नहीं” है। यह समझ न हो, तो बच्चा 70 − 36 का उत्तर 40 लिख देता है।

उधार में आया 1, वास्तव में 10 इकाइयाँ हैं
- कक्षा में हम कहते हैं: “6 में से 1 उधार लो, 2 को 12 बना दो।” बच्चा 6 को काटकर 5 और 2 के ऊपर 12 लिख देता है।
- पर “उधार” शब्द भ्रम पैदा करता है। रोज़मर्रा में उधार वापस किया जाता है, जबकि यहाँ कुछ लौटाना नहीं होता। संख्या वही रहती है, बस उसका रूप बदलता है: 62 = 6 दहाई 2 इकाई = 5 दहाई 12 इकाई।
- यह न दिखे तो गलतियाँ आती हैं: कोई बच्चा इकाई में 12 बनाकर दहाई 6 ही रहने देता है (62 − 38 = 34), तो कोई इकाई में 10 की जगह 1 जोड़ देता है (64 − 45 = 10)।
समाधान: “उधार” का अर्थ बोलकर स्पष्ट करें: “एक बंडल खोला, उसकी 10 तीलियाँ इकाई में आईं।” “एक संख्या के कई नाम” वाली गतिविधि (62 = 5 दहाई 12 इकाई = 4 दहाई 22 इकाई) इस समझ की नींव है।
शून्य वाली संख्या: सबसे आम गलती
ब्राउन और बर्टन ने 1325 बच्चों के घटाव के उत्तरों का विश्लेषण किया। सबसे आम गलती शून्य से उधार की थी (57 बच्चे, जैसे 103 − 45 = 158), और “बड़े में से छोटा” दूसरी सबसे आम (54 बच्चे)। कक्षा 1–3 में यही कठिनाई 70 − 36 जैसे सवालों में दिखती है।
बंडल से करवाने पर बात तुरंत खुलती है। 70 यानी 7 बंडल और एक भी खुली तीली नहीं। एक बंडल खोलते ही 6 बंडल और 10 तीलियाँ बनती हैं। अब 6 तीलियाँ और 3 बंडल निकालने पर 34 बचते हैं, और 40 वाला उत्तर बनता ही नहीं।

शाब्दिक सवाल: घटाव के तीन अर्थ
“निकालना” घटाव का केवल एक अर्थ है। तुलना (“कितने ज़्यादा?”) और अज्ञात भाग (“कितने और चाहिए?”) वाले सवालों में कुछ निकलता नहीं दिखता, फिर भी हल घटाव से मिलता है। ऐसे में “बचे = घटाव, और = जोड़” जैसे कीवर्ड बच्चे को गलत दिशा में ले जाते हैं।

मानक विधि से पहले सिखाएं स्थानीय मान
62 − 38 को हल करने के कई सही रास्ते हैं, और हर रास्ता संख्या की एक अलग समझ को मज़बूत करता है।
- आगे गिनना “बड़े में से छोटा” वाली गलती का सीधा समाधान है, क्योंकि इसमें घटाने की दिशा का सवाल ही नहीं उठता। बच्चा 38 से 62 तक के कदम गिनता है: 2 + 20 + 2 = 24।
- शोध (कामी और डोमिनिक, 1998; फ़्यूसन, 1990) बताता है कि मानक विधि बहुत जल्दी सिखाने से स्थानीय मान की समझ कमज़ोर रह सकती है। मानक विधि तब आए, जब बच्चा उसे अपनी रणनीतियों के छोटे रूप में पहचान सके।

उधार की प्रक्रिया को तीली-बंडल से समझाएं
62 − 38 को इन पाँच कदमों में करवाएँ:
- बच्चा 62 को 6 बंडल और 2 खुली तीलियों से बनाए।
- पूछें: “8 तीलियाँ निकालनी हैं, पर हैं केवल 2। अब क्या करें?” रास्ता बच्चे को खुद सोचने दें।
- बच्चा एक बंडल खोले। अब 5 बंडल और 12 तीलियाँ हैं। पूछें: “क्या कुल तीलियाँ बदलीं?”
- 8 तीलियाँ और 3 बंडल निकालें। बचे 2 बंडल और 4 तीलियाँ, यानी 24।
- अब यही कॉपी में लिखें। हर निशान के साथ बच्चा बोले कि तीलियों के साथ क्या हुआ था।

समझ बनी, इसके संकेत: बच्चा खुद कहे कि “2 में से 8 नहीं निकलतीं, एक बंडल खोलना पड़ेगा”; 6 को काटकर 5 लिखते समय बता सके कि “एक बंडल खुल गया”; और 64 − 45 में कहे कि “4 और 10 मिलकर 14 हुईं।” इन संकेतों के बाद ही उधार के छोटे निशानों पर आएँ।
जोड़कर जाँच: बच्चा खुद पकड़े अपनी गलती
बच्चों में यह आदत डालें: उत्तर + घटाई गई संख्या = ऊपर वाली संख्या। 85 − 19 = 74 को जाँचें: 74 + 19 = 93, जो 85 नहीं है। जब गलती बच्चा खुद पकड़ता है, तो वह शिक्षक के ✗ से कहीं ज़्यादा सिखाती है। हल से पहले अनुमान भी लगवाएँ: 92 − 57 लगभग 35 होगा, तो 45 जैसे उत्तर पर बच्चा स्वयं रुकेगा।

घटाव की ‘समझ जाँचने के लिए’ 8 सवाल
- एक सवाल पर्याप्त नहीं: अलग-अलग गलत नियम कभी-कभी एक जैसा उत्तर दे देते हैं। हर प्रकार के लिए कम से कम दो सवाल रखें।
- शून्य वाले सवाल ज़रूर रखें: जिस परीक्षा में ऊपर की संख्या में शून्य ही न हो, वह सबसे आम गलती को पकड़ नहीं पाएगी।
- अंक नहीं, गलती का प्रकार दर्ज करें, और दो-तीन सवालों पर पूछें: “तुमने यह कैसे किया?”

ब्राउन और बर्टन के शोध से क्या सीख सकते हैं?
ब्राउन और बर्टन ने शिक्षकों के साथ एक खेल खेला, जिसमें कंप्यूटर “गलती करने वाला बच्चा” बनता था और शिक्षक उसका नियम खोजते थे। इससे पता चला कि गलती पहचानने में शिक्षक भी चूकते हैं:

आखिर में, घटाव की गलतियाँ बच्चे की कमज़ोरी का नहीं, उसकी सोच का दस्तावेज़ हैं। 85 − 19 = 74 लिखने वाला बच्चा बता रहा है कि उसे घटाव के तथ्य और कॉलम की प्रक्रिया आती है; उसकी अगली ज़रूरत है एक दहाई को 10 इकाइयों में बदलने का अर्थ। बंडल खोलना, आगे गिनना और जोड़कर जाँच जैसे तरीके इसी अर्थ तक पहुँचाते हैं। अगली बार कोई बच्चा गलत उत्तर लिखे, तो रुकिए और पूछिए: “तुमने यह सवाल कैसे हल किया?”
संदर्भ
- Brown, J. S., & Burton, R. R. (1978). Diagnostic models for procedural bugs in basic mathematical skills. Cognitive Science, 2(2), 155–192.
- Carpenter, T. P., Fennema, E., Franke, M. L., Levi, L., & Empson, S. B. (2014). Children’s Mathematics: Cognitively Guided Instruction (2nd ed.). Heinemann.
- Fuson, K. C. (1990). Conceptual structures for multiunit numbers: Implications for learning and teaching multidigit addition, subtraction, and place value. Cognition and Instruction, 7(4), 343–403.
- Kamii, C., & Dominick, A. (1998). The harmful effects of algorithms in grades 1–4. In L. J. Morrow & M. J. Kenney (Eds.), The Teaching and Learning of Algorithms in School Mathematics (1998 Yearbook). NCTM.
- Ministry of Education, Government of India. (2021). NIPUN Bharat: Guidelines for Implementation.
- NCERT. (2022). National Curriculum Framework for Foundational Stage.
(लेखक परिचय: वृजेश सिंह पिछले एक दशक से अधिक समय से शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत हैं। उन्हें बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता (FLN) और पुस्तकालय कार्यक्रम को बड़े स्तर पर क्रियान्वयन और नेतृत्व करने का गहन अनुभव है। शिक्षा क्षेत्र के अनुभवों को कक्षा-कक्ष में लागू किए जा सकने वाले व्यावहारिक विचारों में ढालना उनके काम की एक विशेष पहचान है। उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज़ (TISS), मुंबई से प्रारंभिक शिक्षा में स्नातकोत्तर किया है।)
(एजुकेशन मिरर से फ़ेसबुक, एक्स और यूट्यूब पर जुड़ें। हमारे WhatsAphp चैनल को फॉलो करें। ईमेल करें अपने लेख और अनुभव educationmirrors@gmail.com पर।)