शिक्षिका अल्पा निगम कहती हैं कि विश्वास में वह ताक़त है जो बिगड़ी हुई बात को भी सुधार सकती है। तो शिक्षकों पर विश्वास करने में कंजूसी क्यों हो रही है? [...]
स्वतंत्र पत्रकार दीपक गौतम लिखते हैं, "इस कहानी में नाम और स्थान बदल दिए गए हैं। चेतना की ''चेतना'' का तो कोई न कोई तार मुझसे जुड़ा हुआ था, जो उनकी पीड़ा मुझ तक पहुंच सकी।" [...]