पुस्तक चर्चा: ‘आ जाओ अब रात!’ – लेखक हाँस सांडे
हाँस सांडे की किताब “आ जाओ अब रात” जीवन, मृत्यु और बचपन की भावनाओं को बेहद संवेदनशील तरीके से छूती है।
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इस कॉलम में बच्चों के लिखे अनुभव। क्लासरूम में उनके अनुभव। शिक्षकों व शिक्षा के बारे में उनकी राय। उनकी बनाई तस्वीरों और बदलते समय के बारे में बच्चों के विचारों को प्रमुखता के साथ पेश करता है।
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हाँस सांडे की किताब “आ जाओ अब रात” जीवन, मृत्यु और बचपन की भावनाओं को बेहद संवेदनशील तरीके से छूती है।
बच्चों के लोकप्रिय कॉलम में आज देखिए पहली कक्षा में पढ़ने वाली आना की बनाई तस्वीरें।
बच्चों की खुशी अक्सर साधारण अनुभवों, छोटे-छोटे उपहारों और अपनेपन से भरे रिश्तों में छिपी होती है…
इस पोस्ट में पढ़िए समर कैंप का एक रोचक अनुभव।
यह स्वीकार करना कि बाकी दुनिया के होने में अपना भी होना शामिल है, एक बहुत बड़ी बात है।
मॉस्को स्थित एक्सपेरिमेंटनियम का विज्ञान म्यूज़ियम बच्चों के लिए एक बेहतरीन जगह है जहां वे खेल-खेल में विज्ञान को समझ सकते हैं। पढ़िए वहाँ के भ्रमण का एक अनुभव।
भारत के संदर्भ में खतरा स्कूल की प्रासंगिकता क्या है, पढ़िए इस लेख में।
यह नीलाभ ठाकुर की लिखी पहली कविता है, जो दिल्ली के एक स्कूल में कक्षा 10वीं के छात्र हैं।
पंछी हैं हम खुले आसमान के खेलते हैं हम पेडों की छाँव में। हम नदी का पानी पीते हैं और शांति से रहते…
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में बच्चे की पिटाई वाली घटना अत्यंत दुःखद है। यह मानसिकता और सोच में बदलाव की आवश्यकता को रेखांकित करता है।