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शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026

गणित शिक्षण: हर बढ़ता क्रम ‘पैटर्न’ क्यों नहीं होता?

26, 31, 45 भी बढ़ता है और 28, 32, 36 भी, फिर एक पैटर्न क्यों है और दूसरा क्यों नहीं? कक्षा 2 के इसी सवाल की पड़ताल करेंगे।

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पहले लेख में हमने जाना कि पैटर्न क्या है और बच्चे इसे कैसे सीखते हैं। इस भाग में पैटर्न शिक्षण की वास्तविक चुनौतियों को समझेंगे और उसके समाधान को लेकर अपनी समझ विकसित करेंगे। कक्षा-2 में शिक्षक ‘संदर्शिका’ से गणित विषय के इस पाठ को पढ़ाते हैं, यहाँ हम उत्तर प्रदेश का विशेष संदर्भ ले रहे हैं। इसके सप्ताह 11 में पैटर्न पर दो दिन का काम है। पहले दिन हम संख्याओं के पैटर्न, दूसरे दिन वस्तुओं और चित्रों के पैटर्न पर काम करते हैं। इसके साथ में अभ्यास पुस्तिका और साप्ताहिक पुनरावृत्ति के सवाल भी हैं। तो आइए देखें कि यह योजना क्या अच्छा करती है, और कक्षा में इसे और गहरा कैसे बनाया जा सकता है।

सबसे ज़रूरी बात: क्रम और पैटर्न का अंतर

पैटर्न से पहले बच्चे संख्याओं का बढ़ता (आरोही) और घटता (अवरोही) क्रम सीखते हैं। अभ्यास पत्रक में सवाल है — 45, 31, 26 को बढ़ते क्रम में लिखिए। उत्तर है 26, 31, 45।

अब संदर्शिका का पहला उदाहरण देखिए। 28, 32, 36, 40, 44 पैटर्न है। लेकिन 54, 58, 59, 60, 61 पैटर्न नहीं है। दोनों क्रम बढ़ रहे हैं। फिर फ़र्क़ क्या है? पहले में हर बार 4 जुड़ता है। दूसरे में पहले 4, फिर 1, फिर 1।

यही बात 26, 31, 45 पर लागू होती है। यह केवल बढ़ता क्रम है, पैटर्न नहीं, क्योंकि अंतर हर बार बदल रहा है। बच्चे के मन में यह साफ़ होना ज़रूरी है — बढ़ता क्रम तब पैटर्न बनता है, जब हर बार अंतराल एक जैसा हो।

चित्र 2: बढ़ता क्रम और बढ़ता पैटर्न

संदर्शिका ने इस पाठ की ‘सामान्य भूल’ भी लिखी है — बच्चे संख्या पैटर्न में सही क्रम नहीं पहचान पाते। इसकी एक बड़ी वजह यही उलझन हो सकती है। इसलिए दोनों पाठों को जोड़कर पढ़ाइए। बच्चों से पूछिए — “क्या 26, 31, 45 भी पैटर्न है? क्यों नहीं?”

संख्या रेखा: अंतराल को अपनी आँख से देखना

संदर्शिका ‘मैं करूँ’ में संख्या रेखा का अच्छा इस्तेमाल करती है। 28 से 48 तक हर छलाँग 4 की है। यहाँ पर दो संख्याओं के बीच का अंतर (गैप) सिर्फ़ गिना नहीं जाता, दिखाई भी देता है। इसलिए संख्या रेखा का उपयोग पैटर्न की अवधारणा सिखाने के लिए एक अच्छी रणनीति है।

घटते पैटर्न में भी यही तरीक़ा काम करता है। 67, 65, 63 में हर बार 2 घटता है, इसलिए 63 के बाद 61 आएगा। बच्चे ज़मीन पर बनी संख्या रेखा पर उलटी छलाँग लगाएँ, तो बात और पक्की होगी। नीचे बने चित्र में हम इसका अवलोकन कर सकते हैं –

चित्र 3: संख्या रेखा पर बढ़ता और घटता पैटर्न

दिवस 1: मैं करूँ, हम करें, आप करो

संदर्शिका की हर कक्षा एक तय ढाँचे में चलती है (चित्र 3)। पहले 10 मिनट गणितीय बातचीत। फिर 7 मिनट शिक्षक करके दिखाते हैं। फिर 13 मिनट बच्चे जोड़ियों में साथ करते हैं। अंत में 10 मिनट बच्चे अकेले करते हैं।

चित्र 3: संदर्शिका की 40 मिनट की कक्षा

इस ढाँचे की तीन ख़ास बातें हैं।

  • बातचीत से शुरुआत: बोर्ड पर ऊपर-नीचे तीर का पैटर्न बनता है। फिर सवाल — क्या यह पैटर्न है? दोहराई जाने वाली इकाई क्या है? शुरुआत वाला तीर बदल दें, तो पूरा पैटर्न कैसे बदलेगा? ऐसे सवाल बच्चे को नियम समझने और अवधारणा समझने में मदद करते हैं।
  • पैटर्न और गैर-पैटर्न साथ-साथ: ‘हम करें’ वाली गतिविधि में सभी बच्चों को पर्चियाँ मिलती हैं। कुछ पर पैटर्न है, कुछ पर गैर-पैटर्न। बच्चे पहले छाँटते हैं, फिर पैटर्न को आगे बढ़ाते हैं।
  • समझ की जाँच (70%): ‘आप करो’ वाली गतिविधि के बाद शिक्षक देखते हैं कि क्या 70% बच्चों ने सही उत्तर दिया। अगर बच्चों के सही उत्तर इससे कम हों, तो उस समूह के साथ ‘हम करें’ वाली गतिविधि फिर से दोहराई जाती है। अगर बच्चे 70% से अधिक सवालों के जवाब दे पाते हैं तो उनको ज्यादा अभ्यास के अवसर देते हैं।

तीसरे कालांश के दौरान बच्चों को गणितीय खेल के माध्यम से पैटर्न को पूरा करने की गतिविधि में शामिल किया जाता है।

दिवस 2: चीज़ों और चित्रों से पैटर्न

दूसरे दिन बातचीत लड़ियों पर चर्चा से शुरू होती है। बच्चों ने घर या मेले में जो लड़ी देखी है, उसके चित्र में पैटर्न खोजा जाता है। यह शुरुआत बच्चे के अपने अनुभव से जुड़ती है।

फिर फूल-पत्ती से बनने वाले पैटर्न आते है। संदर्शिका यहाँ एक अहम शब्द देती है — दोहराई जाने वाली इकाई। पैटर्न आगे बढ़ाना है, तो पहले इकाई पहचानो, फिर उसे दोहराओ।

चित्र 4: फूल-पत्ती, तीली-ब्लॉक और तीर के पैटर्न में इकाई

‘हम करें’ में तीन-तीन बच्चों का समूह बनाते हैं। पहला बच्चा तीलियों और बंडलों से पैटर्न या गैर-पैटर्न बनाता है। दूसरा पहचानता है कि यह पैटर्न है या नहीं। तीसरा उसे आगे बढ़ाता है। एक ही गतिविधि में तीन काम — पैटर्न बनाना, पहचानना और विस्तार देना। खेल में समूह तीली-तीली-ब्लॉक-ब्लॉक जैसे पैटर्न भी बनाते और आगे बढ़ाते हैं।

सीखी जा रही दक्षता पर अभ्यास क्यों जरूरी हैं?

‘मैंने सीख लिया’ और ‘साप्ताहिक पुनरावृत्ति’ के पन्नों में तरह-तरह के पैटर्न हैं — लाल आयत-हरा गोला, केला-सेब, ऊपर-नीचे तीर। संख्याओं में 10, 20, 30; 2, 4, 6; 25, 35, 45; और 55, 66, 77 हैं। बिंदुओं और खानों से बढ़ते पैटर्न भी हैं।

55, 66, 77 पर ख़ास ध्यान दीजिए। यहाँ हर बार 11 जुड़ता है। बच्चे के लिए यह कठिन है, लेकिन सुंदर भी। दहाई और इकाई, दोनों अंक एक-एक बढ़ते हैं। इस पर बात करना अपने आप में एक छोटी खोज है।

लेकिन ज़्यादातर सवाल एक ही तरह के हैं — ‘आगे बढ़ाइए’। पहले भाग के सात चरणों को देखें, तो सप्ताह 11 की तस्वीर कुछ ऐसी बनती है।

चित्र 5: सप्ताह 11 के सवाल और सीखने की सात सीढ़ियाँ

पहचानने, आगे बढ़ाने और इकाई पर काम अच्छा है। लेकिन बीच का छूटा हिस्सा भरने वाले सवाल कम हैं। 10, 14, 18, __, 26, __, 34 जैसा सवाल सिर्फ़ 70% से ऊपर वाले बच्चों को मिलता है। रूप बदलना, यानी एक पैटर्न को दूसरी चीज़ों से बनाने वाले अवसर, लगभग नहीं है।

संदर्शिका से शिक्षण के अलावा क्या करें?

संदर्शिका की योजना मज़बूत है। शिक्षक इसमें कुछ छोटी-छोटी चीजें जोड़ सकते हैं।

  1. नियम बुलवाइए। हर संख्या पैटर्न के बाद पूछिए — “हर बार कितना बढ़ा या घटा?” उत्तर बच्चे के अपने शब्दों में आए।
  2. बीच का खाना सबके लिए। 16, 18, __, 22 जैसे सवाल पूरी कक्षा से कराइए, सिर्फ़ आगे वाले बच्चों से नहीं।
  3. एक पैटर्न, दो रूप। ऊपर-नीचे तीर के पैटर्न को खड़े-बैठे बच्चों में बदलवाइए। फूल-पत्ती को ताली-चुटकी में बदलने का अभ्यास करवाएं।
  4. क्रम और पैटर्न की तुलना। 26, 31, 45 और 28, 32, 36 को बोर्ड पर साथ लिखिए। बच्चे बताएँ कि कौन-सा पैटर्न है और क्यों।
  5. पहले दिन भी थोड़ी चीज़ें। संख्या पैटर्न से पहले पाँच मिनट केवल कंकड़ या तीलियों से शुरुआत कीजिए। ठोस चीजों से सिखाने से अंकों वाले पैटर्न तक पहुंचने का रास्ता छोटा हो जाएगा।

चित्र 6: संदर्शिका के साथ पाँच छोटे जोड़

एक बात और। ‘मैं करूँ’ में एक सवाल है — 69, 63, 66, … में अगली संख्या क्या होगी? इसमें अंतराल एक जैसा नहीं है। शिक्षक इसे “क्या यह पैटर्न है?” वाली चर्चा के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। या 69, 66, 63 लिखकर इसे घटते पैटर्न की तरह पढ़ा सकते हैं।

आधारशिला संदर्शिका पैटर्न को एक साफ़ रास्ता देती है — बातचीत, करके दिखाना, साथ करना, अकेले करना और हर बच्चे की जाँच। इस रास्ते में अगर हम नियम बुलवाना, बीच का खाना और रूप बदलना जोड़ दें, तो बच्चे पैटर्न को सिर्फ़ आगे नहीं बढ़ाएँगे, उसे समझेंगे भी।

और सबसे ज़रूरी बात बच्चे को याद रहे — हर बढ़ता क्रम पैटर्न नहीं होता। पैटर्न वहीं है, जहाँ नियम है।

संदर्भ

  1. आधारशिला क्रियान्वयन शिक्षक संदर्शिका, कक्षा 2, गणित — सप्ताह 11, दिवस 1 और 2 (पृष्ठ 58–59); निपुण कोड M 207.1।
  2. कक्षा 2 अभ्यास पत्रक — ‘संख्या का बढ़ता और घटता क्रम’, ‘मैंने सीख लिया’ और ‘साप्ताहिक पुनरावृत्ति’ (सप्ताह 11)।
  3. पहला भाग — ‘ताली-ताली-चुटकी: बच्चों की पैटर्न से दोस्ती कैसे कराएँ?’, एजुकेशन मिरर।

VS-1(लेखक परिचयः वृजेश सिंह पिछले 10 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। आपके पास  बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता (FLN) के साथ-साथ पुस्तकालय कार्यक्रम के ज़मीनी स्तर पर होने वाले क्रियान्वयन को नेतृत्व देने का सघन अनुभव है। जमीनी अनुभवों को कक्षा-कक्ष में लागू करने योग्य विचारों में बदलना आपकी सबसे बड़ी ताकत है।) 

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