‘पेरेंट नेशन’ किताब से पढ़िए: पेरेंटिंग के 10 ख़ास टिप्स

‘थर्डी मिलियम वर्ड्स’किताब की लेखिका डाना सुस्किंड की एक अन्य लोकप्रिय किताब है ‘पैरेंट नेशन’। यह किताब मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में लिखी गई है। यह किताब माता-पिता द्वारा बच्चों की देखभाल और बेहतर परवरिश को एक नए नजरिए से देखने की गुजारिश करती हैं।
इस किताब में लेखिका कहती हैं कि पेरेंटिंग का विश्वास के साथ गहरा रिश्ता है, जिन विचारों में हम विश्वास या भरोसा करते हैं वह हमारे पेरेंटिंग की भूमिका को काफी हद तक प्रभावित करती हैं। वे कहती है कि जैसे जन्म से कोई डॉक्टर, इंजीनियर या लेखक नहीं होता, हम स्कूल जाते हैं,पढ़ते हैं, सीखते हैं और अलग-अलग प्रोफेशन में अपना करियर बनाते हैं। इसी तरीके से हम जन्मजात पेरेंट्स या माता-पिता भी नहीं होते। हम इस बेहद महत्वपूर्ण भूमिका को निभाने के लिए अकेले जूझते हैं, सीखते हैं और आगे बढ़ते हैं।
“बच्चों के जीवन में प्रारंभिक वर्ष उनके मानसिक और भावनात्मक विकास की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस समय के अच्छे या बुरे दोनों तरह के अनुभव बच्चे के भविष्य को प्रभावित करते हैं। समाज में व्याप्त असमानता, गरीबी और तनाव जैसी समस्याएँ बच्चों के विकास पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं, लेकिन सही तरह से पालन-पोषण और देखभाल से बच्चों के लिए एक बेहतर भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए केवल आर्थिक संसाधन ही नहीं,बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से सुरक्षित होने का अहसास भी जरूरी है। बच्चों के विकास में माता-पिता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है,लेकिन अकेले माता-पिता पर्याप्त नहीं होते। इसके लिए एक सहयोगी समाज की भी आवश्यकता होती है, जो बच्चों को मानसिक विकास के सही अवसर प्रदान कर सके।”
आपके लिए इस किताब से 10 खास बातें साझा हैं जो बेहतर पेरेंट्स बनने में मदद कर सकती हैं –
1. बच्चों से बातचीत है जरूरी
डाना सुस्किंड बातचीत की ताकत में काफी गहरा विश्वास है। वे कहती है कि बच्चों के साथ बातचीत करना उनके मानसिक और सामाजिक-भावनात्मक विकास के लिए बहुत जरूरी है। अपने बच्चों से आप जितना ज्यादा बातचीत करेंगे वह भाषा को लेकर, विचारों को लेकर और संवेदनाओं को लेकर अपनी स्वयं की एक समझ विकसित कर सकेगा। बच्चों के साथ बातचीत का बुनियादी अनुभव उनके मस्तिष्क विकास में भी मदद करता है।
2. सकारात्मक वातावरण बनाएं
बच्चों के लिए एक सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण बनाना आवश्यक है। यदि घर में प्रेम,सहानुभूति और सहयोग का वातावरण होता है तो बच्चों में आत्मविश्वास होता है और वे अपने आसपास की दुनिया को ज्यादा बेहतर ढंग से समझने में समर्थ होते हैं।
3. समय का विवेकपूर्ण उपयोग करें
डाना सुस्किंड का कहना है कि बच्चों को अधिक समय देने का मतलब केवल उनके साथ समय बिताना भर नहीं है। बल्कि उनके साथ गुणवत्ता वाला समय बिताना जरूरी है। इसमें उनकी जिज्ञासा को प्रोत्साहित करता हो, उनकी बातों को सुनना, उनके द्वारा पूछे जाने वाले सवालों का जवाब देना और उनके साथ खेलना भी शामिल है।
4. बच्चों की शिक्षा को मिले प्राथमिकता
पूर्व-प्राथमिक शिक्षा बच्चों के विकास में केंद्रीय भूमिका निभाती है। इसलिए बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए जरूरी संसाधनों तक उनकी पहुंच को सुनिश्चित करना जरूरी है। क्योंकि जीवन के शुरुआती वर्ष सीखने के लिए एक मजबूत आधार का काम करते हैं।
5. समाज और समुदाय से जुड़ने के अवसर दें
अपनी इस किताब में डाना सुस्किंड लिखती हैं कि एक अच्छा समाज और समुदाय बच्चों के पालन-पोषण में सहायक होते हैं। माता-पिता को समुदाय से जुड़कर सहयोग हासिल करना चाहिए और एक दूसरे के अनुभवों से भी सीखना चाहिए।
6. भावनात्मक परवाह भी है जरूरी
माता-पिता की भूमिका केवल बच्चों की शारीरिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना भर नहीं है। बच्चों को भावनात्मक रूप से सुरक्षित होने और स्नेह का सतत अहसास मिलना जरूरी है। यह बच्चों के सकारात्मक आत्मछवि का विकास करता है।
7. खुद के लिए भी निकालें समय
बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी निभाने के दौरान अक्सर माता-पिता अपने व्यक्तिगत जीवन को भूल जाते हैं। या उसके प्रति लापरवाह हो जाते हैं। डाना सुस्किंड मानती हैं कि माता-पिता को भी खुद के लिए समय निकालना चाहिए ताकि वे शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रहें और ज्यादा बेहतर तरीके से बच्चों की देखभाल कर सकें।
8. समानुभूति और समझ विकसित करें
एक माता-पिता की भूमिका में बच्चों के नजरिये से दुनिया को देखना बेहद जरूरी है। डाना सुस्किंड कहती हैं कि बच्चों की भावनाओं और आवश्यकताओं को समझना उनके मानसिक विकास के लिए फायदेमंद होता है। समानुभूति का यह अहसास उनको बेहतर इंसान बनाने में मदद करता है।
9. बच्चों के ‘रोल मॉडल’ बनें
बच्चे अपने माता-पिता से बहुत कुछ सीखते हैं। इसलिए माता-पिता को बच्चों के लिए रोल मॉडल वाली भूमिका निभानी चाहिए। आप जो बात कहें, उसे पूरा जरूर करें। क्योंकि झूठे वादों से बच्चों के मन में एक अविश्वास का भाव आ जाता है कि आप ऐसा कह तो रहे हैं, लेकिन आप ऐसा करेंगे नहीं। इसलिए बच्चों के सामने अपने व्यवहार और फैसलों से सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करें।
10. बच्चों के प्रति उदार रहें
बच्चे कभी-कभी आपकी अपेक्षाओं के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर पाते है। ऐसी स्थिति में माता-पिता को लचीलेपन और धैर्य का परिचय देना चाहिए। जैसे एक माली फूलों देखरेख करता, वैसे ही प्रेम, परवाह और अप्रतिम धैर्य की अपेक्षा आपसे भी है। कभी भी गुस्से में प्रतिक्रिया देने से बचें और बच्चों को लेकर कोई नकारात्मक टिप्पणी करने से बचें। भावनाओं को शब्दों में शालीनता के साथ व्यक्त करना बच्चों को भी अपनी बात रखने की बेहतर तैयारी में मदद करता है।
‘पेरेंट नेशन’ किताब में डाना सुस्किंड ने पालन-पोषण के लिए कई प्रभावी सुझाव दिए गए हैं,जो बच्चों के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास को बढ़ावा देने में मददगार हैं। माता-पिता को अपने बच्चों के लिए एक सकारात्मक और सहायक वातावरण तैयार करना चाहिए, जिसमें सीखने, बातचीत और सहानुभूति का व्यवहार बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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