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प्राथमिक कक्षाओं में कविता शिक्षण को प्रभावशाली कैसे बनाएं?

लाइब्रेरी के माध्यम से पढ़ने की आदत को प्रोत्साहित किया जा सकता है।

                बच्चों में पढ़ने की आदत का विकास करने के लिए लाइब्रेरी जरूरी हैं।

प्राथमिक कक्षाओं में बच्चों के भाषा सीखने की यात्रा को कविताएं रोचक और अर्थपूर्ण बनाती हैं। कविताएं केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह बच्चों की भाषा, भावनाओं, कल्पनाशक्ति, शब्द भण्डार और सोचने की क्षमता को भी समृद्ध बनाती है। एक प्रभावी कविता शिक्षण के लिए कुछ प्रमुख प्रक्रियाएं अपनाई जा सकती हैं जो बच्चों की भागीदारी को बढ़ाती हैं और कविता शिक्षण की प्रक्रिया को जीवंत बनाती हैं।

1. बच्चों के स्तर के अनुसार कविताओं का चयन

कविताओं का चुनाव करते समय यह ध्यान रखना आवश्यक है कि वह बच्चों की उम्र, परिवेशीय अनुभव और भाषा-स्तर के अनुकूल हो। ऐसी कविताएँ जो बच्चों को हँसाएं, चौंकाएँ या जिनसे वे खुद को आसानी जोड़ सकें। इस काम के लिए बाल साहित्य और बाल पत्रिकाओं से अच्छी कविताओं का चुनाव किया जा सकता है। कविताओं पर काम करने के लिए यह सबसे बुनियादी और पहला चरण है।

2. पाठ्यपुस्तक से इतर कविताओं पर काम करना

जब आप कक्षा में बच्चों के साथ कविताओं पर काम करें तो केवल पाठ्यपुस्तक की कविताओं तक सीमित न रहें। पाठ्यपुस्तक के अलावा अन्य स्त्रोंतों से भी कविताओं का चुनाव करें। उसे कक्षा-कक्ष में पोस्टर बनाकर डिसप्ले करें। बोर्ड पर लिखकर बच्चों को कविताएं पढ़ने का मौका दें। उदाहरण के तौर पर आप 10 छोटी-छोटी कविताओं को कक्षा-कक्ष में लगा सकते हैं। इन पर हाव-भाव के साथ बच्चों पर काम करके, उनको स्वतंत्र रूप से पढ़ने का मौका दिया जा सकता है। जब बच्चे अधिकांश कविताओं को समूह में और अकेले बोलकर सुनाने में सहज हो जाएं तो कुछ नई कविताओं को डिसप्ले का हिस्सा बना सकते हैं। इससे बच्चों की कविताओं में रुचि विकसित होगी और नई कविताओं से इस रुचि को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन भी मिलेगा।

3. कविता शिक्षण में बच्चों की सक्रिय भागीदारी

कवि नरेश सक्सेना जी कहते हैं कि कविताओं का अर्थ बार-बार सुनने की प्रक्रिया में एक पाठक के सामने खुलता है। यानि हमें कविताओं को हाव-भाव के साथ पढ़कर सुनाना चाहिए और इन कविताओं को समूह में मिलकर गाना भी चाहिए। ताकि बच्चों को समूह में कविता दोहराने और उनके ऊपर चर्चा करने का मौका मिले। यह प्रयास बच्चों के भाषा विकास को प्रोत्साहित करेगा। सुनना और बोलना दोनों तरह के अवसर बच्चों के भाषा विकास के लिए ज़रूरी हैं। कविता पर चर्चा के दौरान हर बच्चे को बोलने, अपनी बात कहने और सुनाने का अवसर दिया जाना चाहिए।

4. कविता में आने वाले नये शब्दों और उनके अर्थ पर चर्चा

कविता में आने वाले कठिन और नए शब्दों पर बच्चों के साथ चर्चा। इन शब्दों पर वाक्य बनाना और बच्चों को नये वाक्य बनाने का मौका देना, बच्चों के शब्द भंडार को समृद्ध करने में बहुत मदद करेगा। अंततः एक बेहतर शब्द भंडार कविताओं को गहराई से समझने के लिए एक जरूरी आधार प्रदान करता है।

5. कविताओं की लय और तुक पर चर्चा और कविता बनाने का अवसर

कविता की लय और तुक पर बात करना बच्चों को कविता की रचनात्मकता को बढ़ावा देता है। इसके अलावा बच्चों को हमें कविता को आगे बढ़ाने या स्वयं कविता बनाने के लिए भी प्रेरित किया जाना चाहिए। इससे बच्चों में आत्मविश्वास जागृत होता है कि अरे! मैं भी कविताएं बना सकती/सकता हूँ। यहाँ एक गौर करने वाली बात है कि समान ध्वनि वाले शब्दों पर चर्चा के माध्यम से ध्वनि जागरूकता का विकास भी होता है, जो डिकोडिंग यानि शब्दों का सही व सटीक उच्चारण करके पढ़ने के लिए एक आधार मुहैया कराती है।

6. कविता में आए नवीन शब्दों की ‘शब्द दीवार’ बनाना

बच्चों के साथ कहानी या कविता पर चर्चा करते हुए जो भी नये शब्द मिलें, उनके अर्थों की समझ बनाने के लिए चर्चा के साथ-साथ ऐसे शब्दों में कक्षा-कक्ष में डिसप्ले करना भी जरूरी है। इस तरह का डिसप्ले बच्चों को पढ़ने के लिए एक सामग्री भी उपलब्ध कराता है।

8. कविता की पंक्तियों को क्रम में जमाना

कविताओं पर काम करते-करते जब बच्चों को कविताएं याद हो जाएं तो कविता की पंक्तियों को अलग-अलग करके बच्चों को क्रम से जमाने के लिए दिया जा सकता है। इससे उनकी कविता की समझ, वाक्यों की समझ और व्यवस्थित क्रम बनाने की क्षमता का आकलन भी होता है।

9. कल्पनाशीलता और तर्क का विकास

कविता के भावों, पात्रों और कल्पनाओं पर चर्चा कराकर बच्चों को तर्क करने और अपनी कल्पनाओं को अभिव्यक्त करने का अवसर दिया जा सकता है।

10. कविता की शिक्षण योजना के प्रमुख बिन्दु क्या हो सकते हैं?

कविता शिक्षण को सहज और आनंददायी बनाने के लिए इसके शिक्षण की एक पूर्व योजना होनी चाहिए। ताकि हमें पता रहे कि कविताओं पर काम करने का एक व्यवस्थित क्रम कैसा होगा। इसके लिए कविता सुनाने से पहले की चर्चा और भूमिका बनाना, कविताओं को सुनाना, हाव-भाव के साथ कविताओं का समूह में अभ्यास करना, बच्चों द्वारा कविताओं को समूह में व व्यक्तिगत रूप से सुनाने का मौका देना।

इसके अलावा कविताओं पर आधारित शब्दों पर काम और कविताओं से शब्दों को छांटकर शब्द दीवार बनाना, कविताओं की पंक्तियों को क्रम से जमाना, कविताओं की पंक्तियों को मौखिक रूप से आगे बढ़ाना और कविता को आगे बढ़ाने वाले नई पंक्तियों का लेखन करना और कक्षा-कक्ष में डिसप्ले करना और पाठ आधारित सवालों पर चर्चा और मूल्यांकन के चयनित संकेतकों पर काम करने को अपनी शिक्षण योजना का हिस्सा बनाया जा सकता है।

आखिर में कह सकते हैं कि प्राथमिक कक्षाओं में कविता शिक्षण एक रचनात्मक, संवादात्मक और जीवंत अनुभव आधारित प्रक्रिया है। जब शिक्षक किसी कविता को केवल पाठ्यपुस्तक के पाठ के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवंत अनुभव के रूप में प्रस्तुत करते हैं, तब बच्चे न केवल कविताओं का दोहरान करते-करते भाषा सीखने लगते हैं, बल्कि सोचने, महसूस करने के साथ-साथ बिना झिझक के अपने विचारों व बातों को अभिव्यक्त करने की कला भी सीखते हैं। इसीलिए प्राथमिक कक्षाओं में कविता शिक्षण को आनंददायी,सहभागितापूर्ण और योजनाबद्ध अनुभवों से गुजारने का एक जरिया बनाना ज़रूरी है।

(एजुकेशन मिरर से फ़ेसबुकएक्स और यूट्यूब के जरिए भी जुड़ सकते हैं। बच्चों की लिखी सामग्री और उनके बनाये चित्र, अपने मौलिक लेख, पसंदीदा विषय पर कक्षा-शिक्षण के अनुभव और विचार साझा कर सकते हैं educationmirrors@gmail.com पर।)

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