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शिक्षकों के लिए ‘प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी’ के मायने क्या हैं?

रिचर्ड डूफ़ोर कहते हैं, “शिक्षकों की ‘प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी’ का मुख्य उद्देश्य शिक्षण की बजाय खुद सीखने, किसी काम को आपसी सहयोग के जरिये करने और परिणाम की खुद जिम्मेदारी लेने के ऊपर ध्यान देना है।” 

किसी ‘प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी’ में शिक्षक सतत अपनी क्षमता और अभ्यास की कुशलता में बढ़ोत्तरी के लिए सामूहिक रूप से प्रयास करते हैं। शिक्षकों की ‘प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी’ का प्रमुख उद्देश्य अपने साझा प्रयासों के विद्यार्थियों के अधिगम स्तर में बढ़ोत्तरी करना है।

प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी‘ की अवधारणा

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दिल्ली के ‘मेंटर टीचर’ एक कार्यशाला में शैक्षिक उन्नयन लेते हुए। ऐसे प्रयास ‘प्रोफ़ेशनल लर्निंग कम्युनिटी’ के उदाहरण हैं।

स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए ‘प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी’ की अवधारणा का उयोग किया जा रहा है। इस शब्द का इस्तेमाल अनेक अर्थों में किया जा रहा है जैसे शिक्षा के क्षेत्र में साझी रुचि वाले विभिन्न क्षमताओं वाले व्यक्तियों का एक साथ मिलकर किसी समूह का निर्माण, किसी ख़ास कक्षा स्तर तक शिक्षण कार्य करने वाले शिक्षकों का समूह, किसी विद्यालय की समिति, किसी ज़िले के समस्त विद्यालयों के चयनित शिक्षकों का समूह इत्यादि।

वास्तव में ‘प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी‘ इस शब्द का इतने अर्थों में इस्तेमाल किया जा रहा है कि इसके वास्तविक अर्थ के ही ग़ायब होने का ख़तरा है। वे कौन से बड़े विचार हैं जो ‘प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी’ के कोर सिद्धांतों को सामने लाते हैं? इस तरह के सिद्धांतों से एक विद्यालय को बेहतरी की दिशा में आगे बढ़ने में कैसे मदद मिलती है? ऐसे सवालों का जवाब जानना जरूरी है।

विचार-1 यह सुनिश्चित करना कि सभी बच्चे सीख रहे हैं

‘प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी’ का मॉडल इस मान्यता पर आधारित है कि औपचारिक शिक्षा का उद्देश्य केवल बच्चों को पढ़ाना भर ही नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे सीख भी रहे हैं। शिक्षण की बजाय सीखने के ऊपर ध्यान देने वाली छोटी सी बात भी विद्यालयों पर बड़ा सकारात्मक असर डालने वाली साबित हो सकती है।

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उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के शाहाबाद ब्लॉक में स्थित इस परिषदीय विद्यालय को वहां के खण्ड शिक्षा अधिकारी मनोज कुमार बोस ने अंगीकृत किया है। इस माहौल के श्रेय उनके प्रयासों और शिक्षकों को प्रेरित करने के कुशल नेतृत्व को जाता है। 

ऐसे स्थिति में शिक्षक गंभीर सवालों को अनदेखा करने की बजाय उसे समूह में साझा करते हैं। उसके ऊपर मिलकर काम करते हैं। एक ऐसा समाधान विकसित करते हैं जिसे आसानी से कक्षा-कक्ष में लागू किया जा सके। इसे लागू करने के दौरान होने वाली परेशानियों और सफलताओं के संक्षिप्त नोट्स लेते हैं और बैठक में साझा करते हैं। एक-दूसरे के विचारों को बग़ैर टोके सुनते हैं, क्योंकि वे विश्वास करते हैं कि हमारे बीच से आने वाले विचार ही आगे बढ़ने का रास्ता देंगे और समस्याओं को हल करने में मदद करेंगे।

इस तरह की चर्चाओं व बैठकों में शामिल शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों के लिए विचारों व आइडियाज़ का नोट्स लेते हैं। उसे अपने विद्यालय व कक्षा-कक्ष में लागू करने का प्रयास करते हैं।

शिक्षकों के बीच सहयोग और साझेदारी द्वारा सीखने को महत्व

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एससीईआरटी-स्टर के टीचर चेंजमेकर नेटवर्क से जुड़े शिक्षक अपने कार्यों को साझा करते हुए। इन शिक्षकों के बीच नेटवर्क मीटिंग के दौरान आपसी सहयोग के जरिये कक्षा-कक्ष से जुड़ी समस्याओं के समाधान का तरीका भी प्रोफ़ेशनल लर्निंग कम्युनिटी के मॉडल और विचार से मिलता-जुलता है। यहां शिक्षकों को एक-दूसके के अनुभवों से सीखने और नये विचारों को अपने कक्षा-कक्ष में क्रियान्वित करने के बाद अनुभवों को साझा करने का अवसर मिलता है। 

यानि ‘प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी’ सही अर्थों में आपसी सहयोग द्वारा मुश्किल लक्ष्य को हासिल करने और अपने बदलाव करने की क्षमता में भरोसा करना है। इसके साथ ही बच्चों के सीखने की क्षमता में भी भरोसा करना है। इस विश्वास के साथ कि हर बच्चे के सीखने का तरीका अलग-अलग होता है जैसे एक शिक्षक के पढ़ाने और खुद किसी नए संप्रत्यय को सीखने व समझने का तरीका अलग-अलग होता है, यही बात बच्चों के लिए भी लागू होती है।

प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी‘ से जुड़े शिक्षक की पहचान

आमतौर पर शिक्षकों के बीच होने वाली चर्चाओं से एक अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनका विमर्श सिर्फ समस्याओं के विमर्श तक सिमटा रहेगा, या फिर बात समस्याओं के समाधान की दिशा में आगे भी बढ़ेगी। इस संदर्भ में हम कह सकते हैं कि  प्रोफ़ेशनल लर्निंग कम्युनिटी से जुड़े शिक्षकों के सवाल भी अलग होंगे। वे 21वीं सदी के समस्या समाधान जैसे कौशलों का प्रदर्शन करेंगे। उदाहरण के तौर पर  

1. हम प्रत्येक बच्चे को क्या सिखाना चाहते हैं (लर्निंग इंडिकेटर्स)
2. हम कैसे पता करेंगे कि प्रत्येक बच्चे ने हमारे द्वारा पढ़ाये या बताये गये किसी संप्रत्यय या पाठ को सीख लिया है?
3. हम उस स्थिति का जवाब कैसे खोजेंगे, जब किसी छात्र-छात्रा को सीखने में कठिनाई का अनुभव होगा?

उपरोक्त स्थिति तो हर शिक्षक के सामने आनी ही है, इसलिए ऐसे सवालों से बचना संभव नहीं है। ऐसे सवालों का सामना करने में ही एक ‘प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी’ की सफलता छिपी है। ग़ौर करने वाली बात है कि तीसरे सवाल का जवाब ही एक विद्यालय को पारंपरिक विद्यालय से अलग कर देता है। यानि यहां के शिक्षक बच्चों के सीखने की प्रक्रिया पर ध्यान दे रहे होंगे, उनका अवलोकन कर रहे होंगे, कक्षा के ज्यादा से ज्यादा बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित कर रहे होंगे ताकि सभी बच्चों का सीखना सुनिश्चित किया जा सके।

प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी‘ की 5 प्रमुख विशेषताएं

1.  साझा नेतृत्व, जो सहयोग पर आधारित हो

2. साझा मूल्य और विज़न 

3. समूह में सीखना और विचारों का क्रियान्वयन

4. अनूकूल वातावरण का निर्माण

5. व्यक्तिगत अभ्यास

ज़मीनी स्तर पर शिक्षकों की एक ‘प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी’ कैसे बनती है? इसका भारत के संदर्भ में क्या महत्व है? इसके क्रियान्वयन को सुगम बनाने के क्या तरीके हैं, इन मुद्दों पर चर्चा का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। अगर इस संदर्भ में आपके भी कोई सवाल या सुझाव या अनुभव हैं जो जरूर साझा करिए एजुकेशन मिरर की इस पोस्ट के नीचे टिप्पणी के माध्यम से। ताकि शिक्षा पर संवाद के इस सिलसिले को आगे बढ़ाया जा सके।

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2 Comments on शिक्षकों के लिए ‘प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी’ के मायने क्या हैं?

  1. Virjesh Singh // January 17, 2018 at 5:38 am //

    Thank you very much C S Dube Sir. We are trying to connect the discussion with ground reality. So a trust can be build that such Ideas are applicable in school. This can be made possible by teacher’s effort and willingness to take lead for bringing positive change in education sector.

  2. These kind of discussion with in the teachers will lead the self learning process and it’s reflected on students learning outcomes.

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