‘क्लासरूम में अनुशासन से ज्यादा जरूरी है, बच्चों से जुड़ाव’ – अंजली
शिक्षिका अंजली कहती हैं कि मैंने बच्चों से एक कमाल की बात सीखी है कि चाहे जैसी भी परिस्थिति हो, हमें कभी भी अपने चेहरे की मुस्कुराहट को खोने नहीं देना है।
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शिक्षिका अंजली कहती हैं कि मैंने बच्चों से एक कमाल की बात सीखी है कि चाहे जैसी भी परिस्थिति हो, हमें कभी भी अपने चेहरे की मुस्कुराहट को खोने नहीं देना है।
एजुकेशन मिरर से वृजेश सिंह ने शिक्षक साथियों के साथ एजुकेशन मिरर की यात्रा और रचनात्मकता को लेकर संवाद किया।
भारत में स्कूलों के खुलने को लेकर अभी चर्चा और विमर्श का दौर जारी है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय की तरफ से विस्तृत गाइ़डलाइन का हो रहा है इंतजार।
डिजिटल लर्निंग को जारी रखने के लिए डिजिटल लेखन की चुनौती भी हमें स्वीकार करनी होगी।
इस आलेख का हिन्दी में अनुवाद किया है राजेश प्रियदर्शी जी ने।
बाल केंद्रित शिक्षण की अवधारणा ने बाल केंद्रित कक्षा के अवधारणा को एक मजबूत आधार प्रदान किया है।
सार्थक शब्दों का भण्डार समझ के साथ पढ़ने को प्रोत्साहित करता है।
बच्चों की सक्रिय भागीदारी स्थायी बदलाव की पहली शर्त है।
एजुकेशन मिरर शिक्षा के क्षेत्र में संवाद के माध्यम के रूप में स्थापित होने की राह पर अग्रसर है