21वीं सदी में शिक्षा: शिक्षक की प्रतिबद्धता, स्वायत्तता और मिशन का भाव शिक्षा में बदलाव लेकर आयेगा
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में '21वीं सदी में विद्यालयी शिक्षा' विषय पर तीन दिवसीय सेमीनार का हुआ समापन।
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महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में '21वीं सदी में विद्यालयी शिक्षा' विषय पर तीन दिवसीय सेमीनार का हुआ समापन।
एक शिक्षाविद ने कहा, "अगर हम शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना चाहते हैं तो हमें शिक्षण की मात्रा को कम करना होगा।"
'प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी' शिक्षकों द्वारा खुद सीखने के प्रयासों के बारे में है।
आंतरिक रूप से प्रेरित शिक्षक चुनौतियों को अवसर में बदल देते हैं।
शिक्षा में प्रकृतिवाद के समर्थकों में रूसो का नाम सबसे प्रमुख है।
आमतौर हिंदी शिक्षण के दो स्तंभ माने जाते हैं वर्णमाला और बारहखड़ी।
हर बच्चे पर होने वाले खर्च के हिसाब से उत्तर प्रदेश का नंबर पूरे देश में पहले स्थान पर है।
तीन दिन के शिक्षा सेमीनार पर यह विस्तृत रिपोर्ट मनोहर चमोली ने लिखी है।
किसी 'पेशेवर शिक्षक' में क्या विशेषता होती है? पढ़िए इस पोस्ट में।
किसी भी विषय के शिक्षण को समय प्रबंधन की मदद से रोचक और प्रभावशाली बनाया जा सकता है।