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शिक्षा विमर्शः पहली-दूसरी में पढ़ाएं सबसे योग्य और रचनात्मक शिक्षक

तितली की तस्वीर, पाबुला, तितली को गरासिया भाषा में पाबुला कहते हैं।


पहली-दूसरी क्लास को कैसे पढ़ाएं? इस सवाल के जवाब में उत्तर प्रदेश के एक प्राथमिक स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक प्रशांत सिंह कहते हैं, “मेरी राय में कक्षा एक और दो आधार (BASE)कक्षाएं हैं। इन कक्षाओं को पढ़ाने की जिम्मेदारी विद्यालय के सबसे योग्य और रचनात्मक शिक्षकों को दी जानी चाहिए, लेकिन ज्यादातर मामलों में देखा गया है कि स्थिति इस ठीक विपरीत होती है।

कक्षा एक और दो के बच्चों में सीखने की ललक और क्षमता सबसे अधिक होती है जो सही मार्गदर्शन के अभाव में धीरे-धीरे कम होती जाती है। यदि आवश्यकतावश कक्षा एक और दो की कक्षाएं एक साथ लगानी पड़ें तो शिक्षक साथियों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि दोनों कक्षाओं के बच्चों के पूर्वज्ञान को ध्यान में रखते हुए शिक्षण किया जाये।

‘पियर लर्निंग’ को प्रोत्साहित करें

उदाहरण के तौर पर पहली क्लास के बच्चों को अक्षर ज्ञान करवाते समय दूसरी क्लास के बच्चों को कुछ और काम दिया जा सकता है। अगर दूसरी क्लास के बच्चों का मात्रा ज्ञान बहुत पुख्ता नहीं है तो पहली क्लास के बच्चों के साथ उनको भी मात्राएं सिखाई जा सकती हैं। लेकिन यह ध्यान रखना होगा कि पहली क्लास के बच्चों के बोलने का पूरा मौका दूसरी क्लास के बच्चे न ले लें। इसके लिए बच्चों से बात करनी होगी कि जिसको बोलने के लिए कहा जाए, वही जवाब दे। इसके साथ ही कक्षा दो के बच्चों को इस बात के लिए प्रेरित किया जा सकता है कि पहली कक्षा के बच्चों को सीखने की प्रक्रिया में सहयोग करें।

इस तरह से कक्षा एक के बच्चों के कक्षा दो के साथ बैठने के धनात्मक प्रभाव देखे जा सकते हैं। साथ ही साथ कक्षा दो के बच्चों में प्रतिस्पर्धा की भावना भी आती है कि कहीं वे पहली कक्षा के बच्चों से सीखने के मामले में पीछे न रह जाएं। इन बातों का ध्यान रखनकर दोनों कक्षाओं के बच्चों के सीखने की ललक का क्षमतावर्द्धन में अच्छा उपयोग हो सकता है। इसके साथ-साथ उनमें एक-दूसरे से सीखने (पियर लर्निंग) की सकारात्मक भावना का विकास भी किया जा सकता है।

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