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अगर स्थानीय स्तर पर लायब्रेरी की जड़ों को तलाशने की कोशिश करें तो हम पाते हैं कि वहाँ बस पढ़ना सिखाने के लिए पूरा जोर लगाया जाता है। इंसान पढ़ना सीखने के बाद क्या पढ़ेगा? क्यों पढ़ेगा? कैसे पढ़ेगा? पढ़ी जाने वाली सामग्री को समझने के लिए कौन सी रणनीतियों का इस्तेमाल करेगा? ऐसे अनेक सवाल हैं, जो हमारा ध्यान खींचते हैं। ऐसा ही एक बेहद बुनियादी और जरूरी सवाल है कि हर स्कूल में लायब्रेरी क्यों होनी चाहिए?
