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कोविड-19 के दौर में समुदाय की भूमिका को फिर से महत्व देने की जरूरत

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यह तस्वीर उत्तराखंड में हिमोत्थान संस्था द्वारा होने वाले प्रयासों व समुदाय की भूमिका को रेखांकित करती है।

समुदाय को विद्यालय की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जाता है। कोविड-19 के लंबा खिंचने के कारण अभिभावकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। उनके सहयोग के बिना बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों को सरकार या किसी भी ग़ैर-सरकारी संस्था के लिए पूरा करना मुश्किल है। यही कारण है कि सभी स्तरों पर समुदाय के सहयोग और अभिभावकों की भूमिका को महत्व दिया जा रहा है।

वहीं ग़ैर-सरकारी संस्थाओं के काम करने की रणनीति में भी अहम बदलाव हो रहे हैं। कुछ संस्थाओं ने तय कर लिया है कि अगले एक साल तक समुदाय में ही शैक्षिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है ताकि विद्यालय बंद होने की स्थिति में भी बच्चों की शिक्षा की निरंतरता बनी रहें। वहीं अन्य संस्थाओं ने युवाओं के सहयोग से समुदाय में शैक्षिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने का निर्णय किया है।

इस दिशा में बुनियादी साक्षरता व गणित को लेकर काम हो रहे हैं तो कुछ संस्थाओं द्वारा समुदाय में पठन गतिविधियों के साथ-साथ स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस त्रासदी के दौर में बच्चों ने भी अपने-अपने स्तर पर बहुत से प्रयास किये और समुदाय में पुस्तक संस्कृति को प्रोत्साहित करने में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है। ऐसी उदाहरणों व प्रयासों की मौजूदगी बताती है कि विकल्पों का अभाव नहीं है। अगर कोई जरूरत है तो अपने-अपने स्तर पर प्रयास करने और साझे सहयोग के माध्यम से चीज़ों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताने की है।

स्मार्टफोन, मोबाइल के साथ-साथ टीवी व रेडियो को भी सीखने के संसाधन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। दो सोशलमीडिया प्लेटफॉर्म ह्वाट्सऐप और यू-ट्यूब का इस दौर में काफी सक्रियता से इस्तेमाल हुआ है। फेसबुक और ट्विटर को भी शैक्षिक उद्देश्य के साथ और अपने मुद्दों को उठाने के लिए शिक्षक समुदाय द्वारा सक्रियता से इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे पता चलता है कि तकनीकी बदलाव को लेकर वे भी सजग हैं और समय की जरूरत के अनुसार खुद को तैयार भी कर रहे हैं।

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