दूसरी कक्षा की नई पाठ्यपुस्तक का कवर पेज़।
राजस्थान के शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी ने विधानसभा में दिए अपने एक बयान में कहा था, “पाठ्यक्रम में विशेष सुधार किया जायेगा और स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनी को शामिल किया जाएगा ताकि प्रदेश में कोई कन्हैया न पैदा हो।” इस पोस्ट में पढ़िए इस विशेष सुधार की पड़ताल करती रिपोर्ट।
पहली कक्षा के हिंदी की किताब में एक कविता है ‘देश की सेवा’ इसकी पंक्तियां हैं,
“कौन करेगा देश की सेवा
हम भाई हम
कौन चलेगा सच्चा रास्ता।
हम भाई हम
कौन बनेगा अच्छा बच्चा
हम भाई हम”
कौन है अच्छा बच्चा?
‘अच्छा बच्चा’ बनाने की इस कवायद के पीछे की सोच को समझना जरूरी है। अच्छे बच्चे का मतलब क्या है? इस बात को देश सेवा से जोड़ा गया है। मगर देश की सेवा करने के लि हमारा समर्थ होना बेहद जरूरी है। इसके लिए हमें विविध तरह के ज्ञान और कौशल से युक्त होना चाहिए। पढ़ने-लिखने और अपनी क्षमताओं के विकास का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। मगर इन सारे महत्वपूर्ण मसलों पर यह कविता ख़ामोश है। वह केवल अपनी धुन में मगन है और चाहती है बाकी लोग बस केवल सुर में सुर मिलायें। कोई सवाल न करें।
दूसरी कक्षा के हिंदी की किताब में एक पाठ है ‘तिरंगा’। इस पाठ को पढ़ाने के निर्देश में लिखा है, “राष्ट्रीय ध्वज का महत्व समझाएं। देश की आजादी की घटनाएं सुनाएं और वीरता, शांत, सद्भाव आदि मूल्यों के विकास का प्रयास करें।” दूसरी क्लास के बच्चे आमतौर पर पठन कौशल को पुख्ता बनाने के सबसे महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहे होते हैं। ऐसे में उनको पढ़ने के लिए सहज अभ्यास की जरूरत है। वे समझ के साथ पढ़ना सीख पाएं, इस बात पर सबसे ध्यान देने की जरूरत है। मगर किताब की प्राथमिकताओं से तो यही जाहिर होता है कि अगर वे देशभक्ति नहीं सीखे, तो पढ़कर भी क्या लाभ है?
देशभक्ति की कसौटी क्या है?
इस कविता की आखिरी पंक्तियां हैं, “न्योछावर हैं, इस पर प्राण। आजादी की यह है शान।” दूसरी कक्षा के बच्चों के लिए इस शब्द का अर्थ समझना कितना आसान है, इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। इस तरह के पाठों के चुनाव से बेहतर होता है कि ऐसे पाठ चुने जाते जो बच्चों को उनके आसपास के परिवेश से जोड़ते और उनके भीतर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सजगता के विकास में मदद करते।
इसके बाद तिरंगे झंडे के चित्र में रंग भरने का काम दिया गया है। किताबों को देशभक्ति के रंग में रंगने की भरपूर कोशिश की गई है। अगर इतने जतन के बाद भी कोई कन्हैया बन जाये, तो भला उसमें मंत्री जी का क्या दोष है?

