दिल्ली के एक सरकारी स्कूल ने ऐसी बैठक को रोचक बनाने का प्रयास किया। इस पोस्ट में पढ़िए एक सरकारी शिक्षक के अनुभव जो दिल्ली के एक सरकारी विद्यालय में आयोजित बैठक जो मेगा-पीटीएम जैसी थी, उसके बारे में अपने अनुभव साझा कर रहे हैं।
वे लिखते हैं, “आज ह्वाट्सऐप पर एक परिचित ने एक तस्वीर साझा की|इस तस्वीर के विषय में कुछ बातें हुई जो आज के माहौल में उम्मीद की एक किरण नज़र आती है! उनसे कुछ भी बात हुई वह आपके साथ बाँटते हुए बेहद खुशी हो रही है| तो आप भी पढ़िए मेगा PTM की कहानी एक दोस्त की जबानी!
शिष्टाचार और शिकायतों से बचने की जरूरत
इसके लिए जिस स्तर पर प्रयास किए गए उनकी भव्यता के अनुसार ही इसे मेगा PTM कहा गया|
आप यह सोच रहे होंगे कि ऊपर की तस्वीर का इससे क्या ताल्लुक है?
सामान्यतया राजकीय उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यालय के प्रधानाचार्य अपने चारों ओर एक अभेद्य घेरा बनाकर रखते हैं और अगर कोई (माता-पिता) उस घेरे को पार करके उस दुर्ग में (प्रिंसिपल ऑफिस) चला भी जाता है तो सामान्य शिष्टाचार और शिकायतों का दौर चलता है| और इस पूरे समय में अपने विशिष्ट होने का अहसास (प्रधानाचार्य की खास कुर्सी जिस पर से वे उठते नहीं हैं) और आभामंडल को बनाये रखा जाता है|
अभिभावकों से संवाद की सराहनीय पहल
दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 1 सितंबर को पैरेंट-टीचर मीटिंग का आयोजन किया गया। इस बैठक में अभिभावकों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।
इसकी वजह से दोनों तरफ से सिर्फ औपचारिकतायें पूरी होती हैं| इन सबमें सबसे अहम बात पर बात ही नहीं हो पाती है|पर आज जो कुछ मैंने देखा वह क़ाफी सुखद लगा| प्रधानाचार्य स्वयं हरेक अभिभावक का स्वागत कर रहे थे और बच्चे के सीखने के बिषय में बातें कर रहे थे और फिर कक्षा कक्ष की ओर भेज रहे थे|
पैरेंट्स से प्रिंसिपल का संवाद करना अच्छा संदेश है
आज जब लगभग विद्यालय और अभिभावकों के बीच संवादहीनता की सी स्थिति है वहाँ प्रधानाचार्य का इस तरह पहल करना और बच्चों के माता पिता को सहज तरीके से मिलकर बात करना और उन्हें बच्चों के सीखने की प्रक्रिया में शामिल करना अपने आप में अनुकरणीय और सराहनीय है| आपके प्रयासों के लिए आपको साधुवाद!
अगर आपने भी ऐसा कुछ देखा-सुना है तो अपने अनुभव नीचे Comment Box में जरूर साझा कीजिए! ताकि इस विषय पर संवाद के सिलसिले को आगे बढ़ाया जा सके। यह पोस्ट पढ़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद!!
(यह पोस्ट एजुकेश मिरर के लिए दिल्ली से एक शिक्षक साथी ने भेजी है।)

