ऐसी चर्चा कैसे करें जो बच्चों को संदर्भ से जोड़े
बच्चे के अभिभावक चाहते हैं कि बच्चा अगर स्कूल में आ रहा है तो पढ़ना-लिखना सीखे। आत्मविश्वास से भरा हुआ हो। कोई सवाल पूछने पर जवाब दे सके। उदाहरण के तौर पर अगर एक शिक्षक बच्चों को एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित कहानी ‘पका आम’ सुनाने से पहले बच्चों के साथ चर्चा करें कि उन्होंने आम का पेड़ देखा है क्या? पेड़ की पत्ती का रंग कैसा होता है? पेड़ के पत्तों का रंग हमेशा एक सा रहता है कि या अलग-अलग मौसम में बदलता रहता है? पेड़ के पत्तों का क्या-क्या इस्तेमाल होता है? कच्चे आम को स्थानीय भाषा में क्या कहते हैं? कच्चे आम का क्या इस्तेमाल होता है? क्या आप भी कच्चा आम का इस्तेमाल करते हैं, तो कैसे करते हैं।
संदर्भ से साथ जोड़ने की जरूरत क्यों?
इस चर्चा को आगे बढ़ाते हुए हम पूछ सकते हैं कि पके आम का रंग कैसा होता है? पके आम का कैसे इस्तेमाल होता है? आम किस मौसम में आते हैं? आम से जुड़ी कौन-कौन सी कहानी आपने देखी या सुनी है? अगर इस तरह की चर्चा हम बच्चों के साथ करें तो उनके जीवन के अनुभव स्थानीय भाषा में जीवंत रूप से कक्षा के भीतर सहजता के स्थान पा लेंगे। इस दौरान होने वाली चर्चा से अन्य बच्चों के अनुभवों का संसार और भी समृद्ध होगा। इस तरह की चर्चा में अर्थ की मौजूदगी सतत बनी रहती है क्योंकि अर्थ और संदर्भ सा सीधा-सीधा रिश्ता है। इस तरह की चर्चा शब्दों के बारे में भी बच्चों से हो सकती है। शब्दों के ासथ संवाद करते समय हमें पूरे वाक्य का इसीलिए इस्तेमाल करना चाहिए ताकि बच्चे अर्थ का निर्माण कर सकें और वे अर्थ के साथ सतत जुड़े रहें।
अर्थ और संदर्भ का सीधा रिश्ता है। इसलिए संदर्भ के साथ जोड़कर पढ़ाने बच्चों को कोई टॉपिक या विषय बहुत आसानी से समझ में आता है। अगर किसी बच्चे को पढ़ाते समय उसका खुद का नाम या उसके गाँव का नाम पढ़ने के लिए दिया जाये तो बच्चा उसे बेहद आसानी से थोड़े से अभ्यास के बाद सीख लेता है। क्योंकि वह अपना नाम कई लोगों से बार-बार सुनता है और अपने गाँव का नाम भी वह कई बार सुन चुका होता है। इस लिहाज से किसी टॉपिक पर चर्चा पढ़ाई को बहुत मदद करती है।
