35 पन्ने का पत्र बना एक ‘ग्राफिक नॉवेल’
यह किताब भारत के झारखण्ड राज्य के एक गाँव से बोर्डिंग स्कूल में पढ़ने के लिए निकले उस लड़के की कहानी है जिसे दाखिले के बाद अपने बँधे होने का अहसास होता है। इस बँधन में गाँव की याद है और आँसुओं की धार भी है। लेकिन रोने का सिलसिला भी रुकता है और बिक्सू को आगे बढ़ने की राह भी मिलती है। इस किताब के बनने की प्रक्रिया में बताते हुए राज कुमारी एक साक्षात्कार में कहती हैं, “यह किताब 35 पन्नों के एक पत्र पर आधारित है। जो विकास कुमार यानि बिक्सू ने अपनी बचपन की यादों को खंगालकर एक लंबी चिट्ठी के रूप में लिखा था।”
इस किताब में युवावस्था के उस दौर का भी जिक्र है जब हमारा सामना बोर्ड परीक्षाओं से होता है। आस-पड़ोस के लोग परीक्षाओं को लेकर हमेशा टोकते रहते हैं। परीक्षाओं के डर का जो मानवीयकरण इस किताब में किया गया है, वह बड़ा रोचक है। इसमें परीक्षा का डर एक ऐसे शख्स के रूप में सामने आता है जो खुद बोर्ड परीक्षाओं में फेल हुआ होता है, लेकिन उसे दूसरों को डराने का लाइसेंस मिला हुआ होता है। इसके साथ ही प्रेम का भी जिक्र है। तो विस्तार से पढ़िए इस किताब को और आनंद लीजिए बिक्सू की दुनिया से रूबरू होने का। इस किताब की कीमत 525 रूपये है। लेकिन किताब जब आपके समाने होगी तो लगेगा कि किताब की यह कीमत इसकी गुणवत्ता के हिसाब से बिल्कुल उपयुक्त है।
