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प्रिंसिपल को एक ‘स्कूल लीडर’ होना चाहिए



डैनी स्टील कहते हैं, “किसी भी विद्यालय के प्रशासक/प्रिंसिपल ने केवल ऑफ़िस में बैठकर विद्यालय की संस्कृति का निर्माण नहीं किया। किसी भी प्रिंसिपल ने पेपर वर्क के माध्यम से अपने स्कूल में कभी सुधार नहीं किया। मैं जानता हूँ कि विद्यालय में प्रशासनिक देख-रेख की जरूरत है, लेकिन एक स्कूल के लीडर के रूप में हमें देखना होगा कि हम अपने समय का बेहतर इस्तेमाल कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं।”

हमें शिक्षकों और बच्चों के साथ बातचीत के जितने मौके मिलते हैं, उनका बेहतर इस्तेमाल करना चाहिए। अगर हम केवल ऑफ़िस तक सिमटे होते हैं तो ऐसा लगता है कि उस दिन हम फेल हो गये। हमें अपनी ऑफ़िस के दरवाज़े बच्चों के लिए हमेशा खुले रखने चाहिए। स्कूल की अलग-अलग कक्षाओं में जाने का समय निकालना चाहिए। स्कूल के बरामदे में भी टहलना चाहिए ताकि हम ज्यादा से ज्यादा बच्चों से मिल सकें और चीज़ें कैसी चल रही हैं इसको समझकर उसे बेहतर बना सकें।

जब हम एक बच्चे के लिए समानुभूति जाहिर करते हैं, हो सकता है कि इससे बच्चे के परीक्षा में मिलने वाले अंक नहीं बढ़ें…लेकिन एक बच्चे के प्रति हमारी संवेदनशीलता जीवन बदलने वाली साबित हो सकती है। शायद शिक्षा बच्चों के लिए परीक्षा में मिलने वाले अंकों से ज्यादा हासिल करने के लिए है। (We may not raise a test score when we show empathy for a student… but our compassion can change a kid’s life. Maybe there’s more to education than test scores. – Danny Steel)

(एजुकेशन मिरर से फ़ेसबुकएक्स और यूट्यूब के जरिए भी जुड़ सकते हैं। बच्चों की लिखी सामग्री और उनके बनाये चित्र, अपने मौलिक लेख, पसंदीदा विषय पर कक्षा-शिक्षण के अनुभव और विचार साझा कर सकते हैं educationmirrors@gmail.com पर।)

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