एक छोटी बच्ची भी अपना पसंदीदा काम कर रही थी। वह किताब के पन्नों को पलट रही थी। अपने मन में आने वाली बातों को जोर-जोर से बोल रही थी। उसे देखते ही लगा, “अरे! यह तो पढ़ने की एक्टिंग कर रही है।”
पढ़ने का अभिनय भी हो सकता है, इसके बारे में पहले कभी नहीं सोचा था। यह दृश्य सामने देखकर लगा कि ‘पढ़ने का अभिनय’ भी रीडिंग रिसर्च का एक टॉपिक है। इसके ऊपर भी विचार करने की जरूरत है ताकि पढ़ने की एक्टिंग करने वाले बच्चों की मनोस्थिति को समझा जा सके।
इस सवाल का जवाब खोजा जा सके कि कौन सी पढ़ने की एक्टिंग के लिए प्रेरित करती हैं। इस सवाल का जवाब अभी भी मिलना बाकी है कि पढ़ने की एक्टिंग के मायने क्या हैं?

