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स्कूल डायरीः हुक्का गुड़गुड़ाने का अभिनय करते स्टूडेंट्स

बच्चों की दुनिया, एजुकेशन मिरर, भारत में प्राथमिक शिक्षा

हुक्का पीने की एक्टिंग करते बच्चे।

भारत के विभिन्न राज्यों में बच्चों के स्कूल की छुट्टियां हो गई हैं। वहीं राजस्थान के बच्चों को अभी भी छुट्टियां शुरू होने का इंतज़ार है। कल स्कूल का आखिरी दिन है। स्कूल के आखिरी दिनों में शिक्षक नये सत्र की तैयारियों में व्यस्त हैं, तो बच्चे हर दिन को भरपूर इंज्वाय कर रहे हैं।

वे स्कूल में गुजराती इमली (यानि जंगल जलेबी) तोड़कर खाने का लुफ्त ले रहें हैं। बाकी बच्चों के साथ मनपसंद खेल खेलने का आनंद ले रहे हैं। फिसलपट्टी के आसपास ज्यादातर बच्चों की भीड़ नज़र आई जो अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे।

बच्चों का अभिनय

इसी दौरान आज एक अलग नज़ारा दिखा। धुम्रपान की एक्टिंग करने का। कुछ बच्चे पत्तियों में धूल भरने के बाद उसे फूंक मारकर उड़ा रहे थे। बच्चों को दूर से देखने पर ऐसा लग रहा था मानो वे सच में हुक्का पी रहे हों। इस लम्हे के बारे में केवल शब्दों के जरिये बताना मुश्किल था, इसलिए एक तस्वीर आपसे साझा है। तस्वीर में धूल उड़ने वाला लम्हा बहुत अच्छे से क़ैद नहीं हो पाया, वर्ना आप भी इस नजारे पर ताजुब करते।

बच्चे अपने आसपास के परिवेश में जो देखते हैं। उसका अनुकरण करते हैं। उसको अपने हाव-भाव से जाहिर करते हैं। वे दरअसल देखना चाहते हैं कि लोग जैसा कर रहे हैं, वैसा करने में कैसा आनंद आता है। क्या होता है? इसी जिज्ञासा के कारण वे ऐसा काम करते हैं। अगर बच्चे पढ़ने की एक्टिंग करते हैं, तो स्मोकिंग की भी एक्टिंग सही। बच्चों का तो काम ही है, अभिनय करना। हक़ीक़त को कल्पनाओं में तब्दील करना। सपनों को हक़ीक़त में तब्दील करने की जिद ठान लेना। अगली पोस्ट में फिर मिलते हैं किसी और रोचक घटना के साथ।

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