किसी भी संवाद में ज्ञान की रौशनी का उजास फैलाने की क्षमता होती है। शिक्षा के क्षेत्र में यही बात शिक्षक-छात्र के रिश्ते के संदर्भ में भी कही जाती है। शिक्षक बच्चों के जीवन में ज्ञान की रौशनी को पहुंचाने का जरिया बनते हैं, अपनी शिक्षा, व्यवहार, संवाद और विचारों के जरिये। बहुत से विद्यालयों में आपको लिखा मिलेगा कि “शिक्षक वह दीपक है, जो खुद जलकर दूसरों को रौशनी देता है।”
शिक्षक और दीपक की तुलना क्यों होती है?
मगर शिक्षक की भूमिका खुद जलकर दूसरों की ज़िंदगी में रौशनी फैलाने वाले इंसान से कहीं ज्यादा है, इस बात को वर्तमान संदर्भ में समझने की जरूरत है। शिक्षा के क्षेत्र में एक नया स्वपन पल रहा है कि स्कूल आने वाला हर बच्चा ख़ुश हो और एक-दूसरे का सहयोग करे, ऐसे व्यक्तित्व का निर्माण करने की कोशिश एक शिक्षक कर रहा होता है। जबकि उसके सामने का पूरा समाज प्रतिस्पर्धा, होड़, नंबर वन बनने की चाह और हर क्षेत्र में दूसरे को पीछे छोड़कर आगे निकल जाने वाली हड़बड़ी से भरा होता है। इंसान को निराश करने वाले इस दौर में एक शिक्षक का स्वपन हो सकता है कि वह स्वयं दीपक की तरह आलोकित हो और अपने आसपास उम्मीद की रौशनी का प्रसार करे। अपने छात्र-छात्राओं को जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए सतत प्रोत्साहित करे।
ज्ञान साझा करने और सीखने के प्रति प्रेम जरूरी
अपनी भूमिका को केवल रोजगार के अवसर का जरिया न समझे। वह इसे इंसानों की ज़िंदगी में बेहतर बदलाव और जीवन में मजबूत बुनियाद तैयार करने वाले समय का सशक्त प्रहरी माने। वह केवल ज्ञान का प्रसारक बनकर सीमित न हो जाये, बल्कि हर दिशा से आने वाले ज्ञान के लिए उसके दिल में कद्र हो। चाहें वह किसी बच्चे की तरफ से ही क्यों न आ रहा हो। ऐसा नज़रिया एक शिक्षक को खुद भी सतत सीखने की यात्रा में बढ़ने का अवसर देगा, जिससे आप सही मायने में एक शिक्षक की भूमिका को सार्थकता प्रदान कर सकेंगे। आप सभी शिक्षक साथियों को एजुकेशन मिरर की पूरी टीम की तरफ से दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं। आने वाला साल ख़ुशी, ऊर्जा, प्रेरणा और सफलताओं की रौशनी से आलोकित रहे, आप सभी के लिए बस यही प्रार्थना है।