नई सूचनाओं का सिलसिला जारी है
लेकिन यह फिर से देखने वाला समय शायद दोबारा नहीं आता है। क्योंकि हर दिन हमारे सामने सूचनाओं, लेखों, जानकारियों, नवाचारों और शोधों का नया जख़ीरा आ रहा होता है। अबतक हम पुरानी सीखी बातों को अमल में भी नहीं ला पाए होते हैं कि कोई नया विचार फिर से हमारे सामने आ खड़ा होता है।
हम किसी किताब के कुछ पन्ने पढ़ते हैं, फिर अचानक से फ़ोन की घंटी बजती है और हम सामने वाले इंसान से बात करने लग जाते हैं। ऐसी स्थिति में पढ़ने का सिलसिला टूट जाता है और किताब के विचारों के साथ सक्रिय रूप से संवाद करने वाली परिस्थिति फिर से सामान्य परिस्थिति में तब्दील हो जाती है, जहाँ हम फिर से रोज़मर्रा की प्राथमिकताओं में उलझ जाते हैं।
विचारों पर अमल का रास्ता क्या है?
ऐसे लोग जिनका विचारों की दुनिया से वास्ता है, वे नोट्स लेते हैं। ताकि उसे फिर से पलटकर देख सकें। ऐसे में उनको अपने विचारों को ज्यादा व्यवस्थित ढंग से साझा करने और जरूरत पड़ने पर याद करने में मदद मिलती है।
विचारों का नोट्स लेना एक अच्छी आदत है
शिक्षकों की आंतरिक प्रेरणा और पेशेवर विकास के लिए काम करने वाले सौरभ चांडक कहते हैं, “जब भी कोई नया विचार हमारे मन में आये तो हमें उसे डायरी में नोट कर लेना चाहिए। इसके साथ ही हमें तारीख़ और स्थान भी लिख लेना चाहिए। इससे अपनी डायरी को दोबारा पलटते हुए वे चीज़ें फिर से याद आ जाएंगी।”
चीज़ों को भूलने वाले दौर में स्मृति पर बहुत ज्यादा निर्भर रहने वाला उनका सुझाव ग़ौर करने लायक है। इसी तरीके से कुछ लोगों की आदत होती है कि वे किसी मीटिंग के दौरान होने वाली चर्चा को प्वाइंट्स में नोट करते हैं, जबकि जरूरी बातों को दर्ज़ करने के लिए पूरे वाक्य को लिख लेते हैं ताकि उस विचार प्रक्रिया के साथ भागीदारी कर सकें।
आप अपनी रचनात्मक ज़िंदगी को आसान बनाने के लिए कौन से उपाय काम में लेते हैं, साझा करिए एजुकेशन मिरर के साथ। ताकि अन्य दोस्तों को भी आपके विचारों से मदद मिल सके।

